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1901 के बाद आठवां सबसे ज्यादा गर्म साल रहा 2020, जानें पर्यावरण को कैसे हो रहा है नुकसान

Tue, 05 Jan 2021 03:08 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 05 Jan 2021 03:08 PM IST
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imd says 2020 was the eighth warmest year since 1901
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा कि 1901 के बाद से 2020 आठवां सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा लेकिन 2016 की सबसे अधिक गर्मी की तुलना में यह काफी कम रहा। आईएमडी के मुताबिक, गुजरे हुए दो दशक 2001-2010 और 2011-2020 भी सबसे गर्म दशक दर्ज किए गए।

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आंकड़ों के अनुसार, 1901 के बाद से 15 सबसे ज्यादा गर्म वर्षों में 12 वर्ष 2006 से 2020 के दौरान रहे। इसके अनुसार, 1901-2020 के दौरान देश में औसत वार्षिक तापमान सामान्य में 0.62 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई। विभाग ने 2020 के दौरान भारत की जलवायु संबंधी एक बयान में कहा कि वर्ष के दौरान देश में औसत वार्षिक तापमान सामान्य से 0.29 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह आंकड़ा 1981-2010 के आंकड़ों पर आधारित है।
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आईएमडी ने कहा कि 1901 में देश भर के रिकार्ड रखने की शुरूआत हुई और उसके बाद से 2020 आठवां सबसे अधिक गर्म वर्ष रहा। हालांकि, यह 2016 के अधिकतम स्तर से काफी कम है। आईएमडी के अनुसार रिकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा गर्म पांच वर्षों का क्रम इस प्रकार रहा- 2016, 2009, 2017, 2010 और 2015।
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हालांकि 2020 के सबसे गर्म साल होने पर अलग-अलग संस्थाओं की अलग-अलग राय है। कैलीफोर्निया के ब्रेकथ्रू इंस्टीट्यूट के क्लाइमेट साइंटिस्ट जेके हॉसफादर का कहना है कि यह एक मामले में उल्लेखनीय है कि साल 2020 के ली नीना साल और 2016 सुपर इल नीनो घटना थी।

उनका कहना है कि 2016 वाला साल 2.22 डिग्री फॉरेन्हाइट ज्यादा था। जबकि दूसरा गर्म साल 2019, 2.16 डिग्री गर्म था। अभी तक सबसे ज्यादा गर्म साल 2016 बताया जाता है और वातावरण में ग्रीन हाउस गैस की सांद्रता अभी और बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि 2020 जैसे आगे भी खतरनाक तूफान, जंगलों में आग, कम ठंडी और ज्यादा गर्मी जैसी घटनाएं होती रहेंगी।


वैश्विक तापमान में दो डिग्री फॉरेन्हाइट की बढ़ोतरी
जलवायु संबंधित आपदाएं, जंगलों में आग, गर्म हवाएं, सूखा और बाढ़ अमेरिका के हर हिस्से को प्रभावित करते हैं लेकिन गरीब लोग और कमजोर इलाके इन सब आपदाओं से ज्यादा प्रभावित होते हैं। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि औसत तापमान में छोटे से परिवर्तन से भी बड़े-बड़े बदलाव हो रहे हैं। मिट्टी और पौधे सूख रहे हैं, जिससे उनके चारों और गर्म हवा का तापमान पैदा हो रहा है। इसके अलावा भी पर्यावरण को कई तरह के नुकसान हो रहे हैं...

  • आर्कटिक महासागर गर्म हो रहा है, इससे मनुष्य और जानवरों पर गहरा असर पड़ रहा है। 
  • पूरे पश्चिम में जंगलों में लगने वाली आग ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
  • समुद्र का पानी गर्म होना कई मायनों में बुरी खबर है। 
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