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आईएलओ रिपोर्ट : भारत में बेरोजगारी 30 सालों के सर्वोच्च स्तर पर, वर्ष 2020 में 7.1 फीसदी रही
Sat, 29 May 2021 06:58 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 29 May 2021 06:58 PM IST
सार
कोरोना महामारी से देश को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है। इसका संकेत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट से भी मिला है। इसमें बेरोजगारी दर 30 सालों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का दावा किया गया है।
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बेरोजगारी
- फोटो : social media
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विस्तार
देश में बेरोजगारी तीन दशक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन आईएलओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि गत एक दशक में भारत की बेरोजगारी दर अपने पड़ोसी देशों में सबसे ज्यादा रही है। 2009 तक श्रीलंका में बेरोजगारी दर सबसे अधिक थी।
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कोरोना काल में देश में रोजगार काम धंधों पर बुरा असर पड़ा है। आईएलओ के अनुसार 2020 के दौरान भारत की बेरोजगारी दर बढ़ कर 7.11 फीसदी हो गई है। यह पिछले तीन दशक की सबसे ज्यादा है।
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शहरों व गांवों में भी बढ़ रही बेरोजगारी
कोरोना महामारी के कारण शहरों के साथ ही गांवों में भी बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है। 23 मई को समाप्त सप्ताह में शहरी बेरोजगारी दर 17.41 फीसदी पर पहुंच गई। यदि हालात काबू में नहीं आए तो यह और बढ़ कर पिछले साल के उच्चतम स्तर यानी 27.1 फीसदी पर पहुंच सकती है। अप्रैल में दूसरी कोरोना लहर के बाद से अब तक शहरी बेरोजगारी दर डेढ़ गुना बढ़ गई है।
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लॉकडाउन से कामधंधे पर बुरा असर
लॉकडाउन की वजह से शहरों व गांवों में रोजगार पैदा नहीं हो पा रहे हैं। आवाजाही पर रोक ने शहरों में बेरोजगारी बढ़ाई है। दूसरी लहर की शुरुआत के बाद संपूर्ण बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हुई है। 23 मई, 2021 को खत्म हुए सप्ताह के दौरान यह 14.73 फीसदी के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, इससे पहले चार अप्रैल को यह 8.16 फीसदी पर थी। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 8.58 फीसदी से बढ़ कर 13.52 फीसदी पर पहुंच गई।
कोविड महामारी का कामधंधों पर दोहरा असर पड़ा। एक ओर प्रवासी मजदूर घर लौट गए तो दूसरी ओर मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियां इससे बुरी तरह प्रभावित हुईं। ये ठप होने से बचे मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है। ऑटो कंपनियों ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं।