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IUCN: 30 वर्षों में 8603 पैंगोलिनों का अवैध व्यापार, आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल

Fri, 05 Jan 2024 06:21 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 05 Jan 2024 06:21 AM IST
सार

पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों पश्चिम बंगाल, मणिपुर, मिजोरम और असम में सबसे अधिक मात्रा में पैंगोलिन जब्त किए गए। अकेले मणिपुर में इस दौरान करीब 3,312 पैंगोलिन जब्त किए गए थे। इसके बाद मिजोरम में 1049, पश्चिम बंगाल में 1038 और असम में 906 पैंगोलिन या उनके हिस्सों के बराबर बरामदगी हुई है।  

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Illegal trade of 8603 pangolins in 30 years includes in IUCN endangered species list
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती मांग की वजह से भारत में पैंगोलिन का तेजी से अवैध शिकार हो रहा है। पिछले तीन दशकों में भारत में 8,603 पैंगोलिन इस अवैध कारोबार की भेंट चढ़े हैं। सबसे अधिक मामले ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सामने आए हैं।  दुनियाभर में जितने वन्य जीवों की अवैध तस्करी होती हैं उनमें 20 फीसदी की हिस्सेदारी केवल पैंगोलिन की है। यही वजह की इन जीवों को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की संकटग्रस्त प्रजातियों की लिस्ट में शामिल किया गया है, जिनकी आबादी तेजी से कम हो रही है।

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मणिपुर में सबसे अधिक बरामदगी
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों पश्चिम बंगाल, मणिपुर, मिजोरम और असम में सबसे अधिक मात्रा में पैंगोलिन जब्त किए गए। अकेले मणिपुर में इस दौरान करीब 3,312 पैंगोलिन जब्त किए गए थे। इसके बाद मिजोरम में 1049, पश्चिम बंगाल में 1038 और असम में 906 पैंगोलिन या उनके हिस्सों के बराबर बरामदगी हुई है।  

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भारत में बढ़ रहा अवैध कारोबार
शोध से पता चला है कि चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों में पैंगोलिन की जबदस्त डिमांड है। इसके चलते भारत से बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी हो रही है। 1991 से 2022 के बीच के आंकड़ों पर गौर करे तो पैंगोलिन की बरामदगी की 426 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें 8,603 पैंगोलिन के अवैध व्यापार का खुलासा हुआ है। यह विश्लेषण वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन, मॉनिटर कंजर्वेशन रिसर्च सोसाइटी, ऑक्सफोर्ड वाइल्डलाइफ ट्रेड रिसर्च ग्रुप, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन रिसर्च यूनिट से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इसके नतीजे यूरोपियन जर्नल ऑफ वाइल्डलाइफ रिसर्च में प्रकाशित हुए हैं।

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केराटिन के बने इनके शल्क की खास मांग
यह शर्मीले जीव करीब पिछले छह करोड़ वर्षों से पृथ्वी पर मौजूद है, जो चींटी और दीमक जैसे कीड़ों को खाकर गुजारा करते हैं। इनके शरीर पर केराटिन के शल्क (स्केल) बने होते है, जिसकी वैश्विक बाजार में जबर्दस्त डिमांड है। दुनियाभर में पैंगोलिन की आठ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से चार अफ्रीका में और चार एशिया में मिलती हैं। भारत में दो प्रजातियां मैनिस क्रैसिकाउडाटा और मैनिस पेन्टाडैक्टाएला पाई जाती है।

प्रतिबंधित होने के बावजूद अवैध शिकार की घटनाएं चिंताजनक
अंतराष्ट्रीय स्तर पर इसके बढ़ते अवैध व्यापार के चलते 2017 से ही पैंगोलिन की सभी प्रजातियों को कन्वेशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इन्डेन्जर्ड स्पिशीज के परिशिष्ट एक में सूचीबद्ध किया गया है, जो किसी भी रूप में इनके अंतराष्ट्रीय व्यापार पर रोक लगाता है। इसके बावजूद इनके अवैध व्यापार की सामने आती यह घटनाएं बड़ी चिंता का विषय हैं।

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