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अवैध बांग्लादेशी देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा, संसदीय समिति ने की बाहर भेजने की मांग
Mon, 07 Jan 2019 09:30 PM IST
पूजा मेहरोत्रा
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: पूजा मेहरोत्रा
Updated Mon, 07 Jan 2019 09:30 PM IST
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चुनाव के ठीक पहले एनआरसी का मुद्दा एक बार फिर गरमा सकता है। नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों को देश के लिए खतरा बताया गया है और इनके बहुत धीरे प्रत्यर्पण पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समिति ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों में अपनी रिपोर्ट पेश कर दिया।
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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1986 से लेकर अब तक देश में 90 हजार से अधिक विदेशी नागरिकों को अवैधरूप से भारत में रहने का दोषी पाया गया था। पुलिस ने कई मामलों में कार्रवाई की और विदेशियों को देश से बाहर भेजने का प्रयास किया। लेकिन अनेक कारणों से यह कार्रवाई जरुरत से बहुत कम हुई और केवल 2400 विदेशियों को ही देश के बाहर भेजा जा सका।
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बांग्लादेशी नागरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासी भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्हें दिल्ली सहित अनेक शहरों में अनेक गंभीर अपराधों में लिप्त पाया गया है। पुलिस ने इन पर कार्रवाई भी की है। दिल्ली के अनेक थानों में इनके खिलाफ मामले दर्ज हैं। लेकिन अभी भी इन्हें बाहर नहीं भेजा जा सका है।
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बता दें कि भाजपा ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था। वह असम के अलावा पश्चिम बंगाल और दिल्ली से भी विदेशी बांग्लादेशियों को बाहर भेजने की मांग करती रही है। असम में मूल नागरिकों की पहचान एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है।
दिल्ली में भी बना मुद्दा
वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की कई सीटों पर लोगों के नाम मतदाता सूची/नागरिकता रजिस्टर से हटाए जाने की बात कही है। आप ने कहा है कि कई विधानसभा सीटों से बनियों और अन्य वर्ग के नाम काटे जा रहे हैं। जबकि दिल्ली भाजपा ने इसका खंडन किया है और कहा है कि मतदाता सूची में नाम काटना या जोड़ना चुनाव आयोग का काम होता है। किसी का नाम कटने पर वह उसके खिलाफ अपील कर सकता है। बीजेपी के नेताओं ने इसे आप का बांग्लादेशियों के प्रति प्रेम बताया है।