IIT Suicide Case: मुंबई की विशेष अदालत ने आरोपी छात्र को दी जमानत, खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप
दर्शन सोलंकी अहमदाबाद का रहने वाला था और बीटेक (केमिकल) के प्रथम वर्ष का छात्र था। सेमेस्टर की परीक्षा समाप्त होने एक दिन बाद 12 फरवरी को उसने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
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मुंबई की एक विशेष अदालत ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र अरमान खत्री को जमानत दे दी है। उसे इसी साल अपने साथी छात्र दर्शन सोलंकी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके वकील दिनेश गुप्ता ने बताया कि अदालत ने खत्री को 25,000 रुपये की नकद जमानत देने का निर्देश दिया है।
छात्रावास की सातवीं मंजिल से कूदकर दी जान
दर्शन सोलंकी अहमदाबाद का रहने वाला था और बीटेक (केमिकल) के प्रथम वर्ष का छात्र था। सेमेस्टर की परीक्षा समाप्त होने एक दिन बाद 12 फरवरी को उसने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। दर्शन सोलंकी ने उपनगर पवई में आईआईटी-बॉम्बे परिसर के एक छात्रावास की सातवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।
एसआईटी का दावा- कमरे में मिला एक लाइन का सुसाइड नोट
तीन हफ्ते बाद मुंबई पुलिस के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सोलंकी के कमरे से एक लाइन का सुसाइड नोट मिला। इसमें लिखा था- अरमान ने मुझे मार डाला। खत्री को शहर की अपराध शाखा के विशेष जांच दल ने 9 अप्रैल को गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक धमकी देने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अरमान की धमकी के बाद डरा हुआ था छात्र
पुलिस के मुताबिक, मौत से दो दिन पहले सोलंकी ने खत्री के साथ बातचीत में कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी की थी, जिसके बाद खत्री ने सोलंकी को पेपर कटर से धमकी दी थी। पुलिस ने दावा किया कि सोलंकी इस घटना से काफी डरे हुए थे और उसे उस रात बुखार आ गया था। पुलिस के अनुसार सोलंकी ने खत्री को व्हाट्सएप संदेश भेजकर टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी और कहा था कि वह घर वापस जा रहा है और मुंबई छोड़ रहा है।
आरोपी ने कहा- कोई सबूत नहीं....
खत्री ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि उसे निशाना बनाया गया है और मामले में फंसाया गया है। याचिका में कहा गया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि खत्री ने सोलंकी को सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाया था। इसमें आगे कहा गया है कि सोलंकी के माता-पिता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में खत्री के खिलाफ कभी कोई आरोप नहीं लगाया। याचिका में कहा गया है कि खत्री एक युवा छात्र है जिसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि (क्रिमिनल बैकग्राउंड) नहीं है और इस तरह की कैद से उसका भविष्य प्रभावित होगा।