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अध्ययन: ओजोन में कोई गंभीर छेद नहीं, न ही सेहत को खतरा; आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने दावों का किया खंडन
Thu, 05 Sep 2024 06:26 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 05 Sep 2024 06:26 AM IST
सार
शोधकर्ताओं ने पिछले 5 दशकों (1980-2022) के दौरान उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ओजोन की कमी और ओजोन में स्थानिक प्रवृत्तियों की जांच करने के लिए जमीनी, ओजोनसॉन्ड और उपग्रह ओजोन माप का विश्लेषण किया। ओजोनसॉन्ड छोटे, हल्के वजन वाले उपकरण हैं।
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ओजोन
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने अपने नए अध्ययन में उष्णकटिबंधीय वायुमंडल क्षेत्र में गंभीर ओजोन छिद्र के दावों का खंडन किया है। पिछले शोध में कहा गया था कि ऐसा ओजोन छिद्र संभावित रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाली दुनिया की आधी आबादी के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इस अध्ययन ने ऐसे किसी संभावित स्वास्थ्य खतरे को भी नकार दिया है।
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संस्थान ने यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर किया गया है। यह अध्ययन एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड फिजिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें शोधकर्ताओं ने पिछले 5 दशकों (1980-2022) के दौरान उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ओजोन की कमी और ओजोन में स्थानिक प्रवृत्तियों की जांच करने के लिए जमीनी, ओजोनसॉन्ड और उपग्रह ओजोन माप का विश्लेषण किया। ओजोनसॉन्ड छोटे, हल्के वजन वाले उपकरण हैं। इन्हें मौसम के गुब्बारों पर उड़ाया जाता है तथा डाटा संचरण और तापमान, आर्द्रता, हवा और स्थिति के मापन के लिए रेडियोसॉन्ड के साथ इंटरफेसिंग इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से जोड़ा जाता है। इससे परिणाम सटीक प्राप्त होते हैं।
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ओजोन मापने की इकाई की सीमा से ऊपर
अध्ययन में जमीनी, उपग्रह और पुनर्विश्लेषण डाटा की एक विस्तृत श्रृंखला का उपयोग किया गया। इससे पता चला कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण ओजोन छिद्र के लिए कोई मजबूत साक्ष्य नहीं है। इन क्षेत्रों में औसत ओजोन स्तर ओजोन छिद्र को परिभाषित करने के लिए उपयोग की जाने वाली 220 डॉबसन इकाइयों की महत्वपूर्ण सीमा से काफी ऊपर है। ओजोन छिद्र को उस क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है जहां ओजोन स्तंभ का मान 220 डॉबसन इकाइयों (डीयू ) या उससे कम होता है। डॉबसन इकाई, ओजोन सांद्रता को मापने के लिए सबसे आम इकाई है। वैश्विक स्तर पर, औसत कुल ओजोन सांद्रता आम तौर पर लगभग 300 डीयू होती है। डॉबसन इकाइयों की माप से मिले साक्ष्य के आधार पर यह साबित हो गया कि ओजोन परत में कोई गंभीर छिद्र नहीं है।
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ओजोन छिद्र की रिपोर्ट करने वाले पहले के अध्ययन में अपर्याप्त डाटा पर भरोसा किया गया था। मुख्य रूप से सतह से 11 किमी की ऊंचाई, 15-20 किमी की ऊंचाई पर ओजोन के स्तर का सटीक आकलन करने के लिए अपर्याप्त है। इस अध्ययन ने पिछले शोधकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए गए आंकड़ों में उच्च अनिश्चितता और कमियों की भी पहचान की, जिसके कारण गलत निष्कर्ष निकले।
उष्णकटिबंधीय आबादी सुरक्षित
वर्तमान वायुमंडलीय हैलोजन स्तरों के आधार पर अध्ययन पुष्टि करता है कि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर ओजोन छिद्र बनने का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। इस प्रकार उष्णकटिबंधीय आबादी के लिए कोई स्वास्थ्य खतरा नहीं है। समताप मंडल के ओजोन का मुख्य कार्य यूवी किरणों को अवशोषित करना है, जो जीवित जीवों के लिए बहुत हानिकारक हो सकती हैं। वे त्वचा को जला सकते हैं और कोशिका क्षति पहुंचा सकते हैं, आनुवंशिक सामग्री को स्थायी रूप से बदल सकते हैं और मेलेनोमा सहित कैंसर का कारण बन सकते हैं।