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शैवाल-बैक्टीरिया से प्रदूषित पानी की सफाई में जुटा IIT हैदराबाद, बायोडीजल बनाने की भी कोशिश

Wed, 25 Dec 2019 02:54 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: योगेश साहू Updated Wed, 25 Dec 2019 02:54 AM IST
सार

  • बड़े आवासीय प्रोजेक्ट से निकले पानी की सफाई के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था पर दिया वैज्ञानिकों ने जोर
  • 260 करोड़ लीटर पानी ही फिलहाल ट्रीट हो रहा है।
  • घरों व सोसायटी के स्तर पर पानी ट्रीटमेंट का काम होना चाहिए

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IIT Hyderabad engaged in cleaning of polluted water from algae and bacteria
Sex Disease by Bacteria - फोटो : Pixabay

विस्तार

शहरों से निकले गंदे पानी की सफाई शैवाल और बैक्टीरिया के जरिये करने की तकनीक पर आईआईटी हैदराबाद केे वैज्ञानिकों ने शोध शुरू किया है। वे न केवल पानी को साफ करने, बल्कि उसके जरिये बायोडीजल बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं। इसका फायदा घरों और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स से ही निकले पानी की सफाई प्रक्रिया शुरू करने में मिल सकता है।
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शहरों में फिलहाल उपयोग हो रही पानी की ट्रीटमेंट व्यवस्थाओं को संस्थान के अध्ययनकर्ताओं ने नाकाफी बताया। यही वजह है कि भारी मात्रा में गंदा प्रदूषित पानी जलाशयों और खाली जमीन पर छोड़ा जा रहा है। इस वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है, साफ पानी भी अनुपयोगी होता जा रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है
  • 7500 करोड़ लीटर गंदा व प्रदूषित पानी रोजाना पैदा कर रहे शहरों में सफाई के लिए विकेंद्रीकृत पानी फिल्टर प्रोजेक्ट की जरूरत आईआईटी हैदराबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर देबराज भट्टाचार्य बताते हैं।
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  • 260 करोड़ लीटर पानी ही फिलहाल ट्रीट हो रहा है।
  • घरों व सोसायटी के स्तर पर पानी ट्रीटमेंट का काम होना चाहिए।
दिक्क्तें 
बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट के रूप में समाधान की तलाश की जा रही है। संस्थान के विशेषज्ञों का मानना है कि सूक्ष्मजीव खासतौर से बैक्टीरिया इन प्रदूषक तत्वों को नष्ट कर सकते हैं। वे स्लज बनाने की प्रक्रिया को तेज करते हैं और प्रदूषक तत्वों को बायोमास और कार्बन में बदलने लगते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी ऊर्जा की जरूरत होती है और स्लज भी काफी बनता है।

समाधान की तलाश
दूसरी ओर शैवाल-बैक्टीरिया का उपयोग करने पर ऊर्जा की जरूरत व स्लज की समस्याएं खत्म हो जाती हैं। फिलहाल इस अध्ययन को ग्रामीण स्तर पर लागू करके प्रयोग किए जा रहे हैं। यहां घरों गंदे पानी को इन शैवाल-बैक्टीरिया के इन-हाउस ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट किया ज रहा है।


बायोडीजल का भी उत्पादन
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार शैवाल-बैक्टीरिया से पानी की सफाई के दौरान ट्रीटमेंट प्लांट में पनपी शैवाल का उपयोग बायोडीजल बनाने में भी हो सकता है। यह बाय-प्रोडक्ट जीवाश्म ईंधन के रूप में मिलने वाले डीजल के मुकाबले ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
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