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नीट और जेईई की परीक्षा होने दीजिए, छात्रों के भविष्य की बात है- प्रो. वी रामगोपाल राव

Fri, 28 Aug 2020 08:09 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 28 Aug 2020 08:09 PM IST
सार

मानव सरकार विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा समय पर होगी। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के डा. विनीत जोशी भी परीक्षा की तैयारी को लेकर आश्वस्त हैं। एनटीए का कहना है कि कोविड-19 के संक्रमण को लेकर छात्रों-अभिभावकों को परेशान नहीं होना चाहिए...

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IIT Delhi Director Professor V Ramgopal Rao said Let NEET and JEE exams should not postponed, its a matter of students future
आईआईटी दिल्ली - फोटो : File Photo

विस्तार

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक नीट और जेईई-2020 परीक्षा कराने का मन बना चुके हैं। इस बार यह परीक्षा आईआईटी दिल्ली संचालित कर रही है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. वी रामगोपाल राव का कहना है कि नीट और जेईई-2020 को होने देना चाहिए, छात्रों के भविष्य का सवाल है।

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वहीं आईआईटी एलुमनाई काउंसिल के रवि शर्मा का भी कहना है कि इसमें किसी को बाधा नहीं बनना चाहिए। रवि शर्मा का कहना है कि एक न एक दिन सबकुछ सामान्य होना है। आखिर कब तक छात्रों को घर बिठाकर रखा जा सकेगा? हालांकि रवि शर्मा का कहना है कि परीक्षा तो हो जाएगी, लेकिन मूल्यांकन एक चुनौती बन सकता है।

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छात्रों की सुरक्षा का पूरा ख्याल...समय पर होगी परीक्षा

मानव सरकार विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा समय पर होगी। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के डा. विनीत जोशी भी परीक्षा की तैयारी को लेकर आश्वस्त हैं। एनटीए का कहना है कि कोविड-19 के संक्रमण को लेकर छात्रों-अभिभावकों को परेशान नहीं होना चाहिए। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी।

सुबह की पाली के छात्रों को ऑड नंबर की और दूसरी पाली के छात्रों को इवेन नंबर की मशीनें दी जाएंगी। परीक्षा से पहले परीक्षा केंद्र की दीवारों, कमरों, कॉमन एरिया, डेस्क-बैंच, कंप्यूटर आदि को गंभीरता के साथ सैनिटाइज किया जाएगा। कोविड-19 संक्रमण को ध्यान में रखते हुए छात्रों को दूर-दूर बिठाया जाएगा। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन होगा और परीक्षा को संपन्न कराने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया गया है।

लेकिन छात्र परीक्षा केंद्र तक आएंगे कैसे?

बड़ा सवाल है? इस सवाल पर रवि शर्मा के पास कोई बहुत स्पष्ट जवाब नहीं है। वह कहते हैं कि राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी निभाएं। दोगुनी बसों को चलवाएं और छात्रों की मदद करें। प्रो. वी रामगोपाल राव भी यही कह रहे हैं। प्रो. रामगोपाल राव ने इसमें आईआईटी के छात्रों, एलुमनाई से भी सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि 95-99 फीसदी छात्रों को उनकी पहली पसंद वाले परीक्षा केंद्र दिए गए हैं।

लेकिन दूर-दराज, गांव और सुदूर क्षेत्र के लोक परीक्षा केंद्र तक कैसे आएंगे? इसके जवाब में प्रो. वी रामगोपाल राव का कहना है कि इसके लिए सरकार को आगे आना होगा। राज्य सरकारों को छात्रों की सहायता करनी होगी। स्थानीय प्रशासन को बड़ी संख्या में बसें चलानी होंगी और सामान्य नागरिक को अपनी कार, स्कूटर, मोटर साइकिल जैसे भी हो छात्रों को उनके परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में मदद करनी होगी। प्रो. वी रामगोपाल राव का कहना है कि 27 सितंबर को जेईई एडवांस की परीक्षा होगी। वह इस दौरान दिल्ली के चार सेंटरों में खुद जाएंगे। उनका कहना है कि हमारा मुख्य उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा ही रहेगा।

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छात्रों की परेशानी भी यही है, केंद्र तक कैसे पहुंचगें?

छात्रों में जहां कोविड-19 के संक्रमण का शिकार होने की आशंका है, वहीं घर से निकलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने, परीक्षा के बाद घर लौटने की परेशानी तथा इस दौरान दो गज के सामाजिक दूरी के पालन की है। दिल्ली में विनीत सिंह जेईई के छात्रों को तैयारी कराते हैं। विनीत का कहना है कि उन्हें उनके कुछ पढ़ाए छात्र फोन कर रहे हैं। ये छात्र अपने गांव में हैं। वहां बिजली, इंटरनेट की समुचित व्यवस्था न हो पाने से छात्रों की ढंग से तैयारी नहीं हो पाई है।

दूसरे कई अच्छे छात्रों के पास केवल मोबाइल फोन है। उनके लिए ऑनलाइन सिस्टम पर आना, इंटरनेट के लिए डाटा खरीदना उतना मुश्किल नहीं है, उससे बड़ी परेशानी उनके गांव में डाटा की उपलब्धता है। नारायणा कोचिंग से जुड़े एक शिक्षक भी कुछ इसी तरह की परेशानी बता रहे हैं। वह एक सवाल और उठाते हैं कि आखिर छात्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचेगे कैसे? हालांकि उन्हें उम्मीद है कि परीक्षा की तारीख नजदीक आने तक कोई न कोई इंतजाम हो जाएगा।

आम सहमति से हो निर्णय : सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर उनकी सहमति से परीक्षा के बारे में निर्णय लेने की सलाह दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री से मिलकर परीक्षा को टालने का अनुरोध किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी जेईई-नीट की परीक्षा टालने का सुझाव दिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह (पंजाब), अशोक गहलोत (राजस्थान) समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का मानना है कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभी इसे टाल दिया जाना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के एमएलसी संजय लाठर का कहना है कि तमाम एहतियात के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार के दो मंत्री कोविड-19 संक्रमण का शिकार हो गए। कई मंत्री, विधायक कोविड-19 से ग्रस्त हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्टाफ में कोविड-19 का संक्रमण फैल गया। केंद्र सरकार के मंत्री भी पीड़ित होकर अस्पताल में इलाज कर रहे हैं। लाठर का कहना है कि जब मंत्री तक सुरक्षित नहीं हैं, तो छात्रों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाने की क्या गारंटी। यह एक बड़ा सवाल है और केन्द्र सरकार को सोचना चाहिए।

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