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सीआरपीएफ के इन 13 योद्धाओं की शौर्य गाथा पढ़नी है तो पलटें 'द शौर्य अनबाउंड' के पन्ने

Sun, 13 Dec 2020 10:17 PM IST
संजीव कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 13 Dec 2020 10:17 PM IST
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If you want to read the valor saga of these 13 warriors of CRPF, then flip the pages of The Shaurya Unbound
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला किताब का विमोचन करते हुए - फोटो : ANI

संसद हमले की बरसी पर देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, 'सीआरपीएफ' ने अपने उन 13 योद्धाओं की शौर्य गाथा को एक पुस्तक में संकलित किया है, जिन्हें वीरता के चक्र से सम्मानित किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष, ओम बिरला ने रविवार को अंग्रेजी संस्करण 'द शौर्य अनबाउंड' और हिंदी रुपांतरण 'समुंद समावे बुंद में, पुस्तक का विमोचन किया है।

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सिपाही कमलेश कुमारी, जिन्हें 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया था, की शौर्य गाथा भी इस पुस्तक में शामिल की गई है। खास बात है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में वीरता के गौरवशाली इतिहास को किसी पेशेवर लेखक ने नहीं, बल्कि इस बल के ही अपने शूरवीरों ने लिखा है।
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सीआरपीएफ के डीआईजी 'इंटेलिजेंस' एम दिनाकरण और डीआईजी नीतू के निर्देशन में यह किताब लिखी गई है। इसमें सहायक कमांडेंट अमित और इंस्पेक्टर दीपक सक्सेना ने भी अपना योगदान दिया है। इस बल में दो हजार से अधिक वीरों और वीरांगनाओं को वीरता के पदक से सम्मानित किया जा चुका है। यह संख्या किसी भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में सर्वोच्च है। इस सोच के साथ कि देश का प्रत्येक नागरिक इन योद्धाओं के साहस, देश भक्ति, निष्ठा, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति निस्वार्थ समर्पण की सच्ची कहानियों को जान सके, इसलिए इनकी गाथा एक पुस्तक में संकलित की गई है।
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पुस्तक में कांस्टेबल कमलेश कुमारी, अशोक चक्र (मरणोपरांत) और चार शौर्य चक्र प्राप्तकर्ताओं-हेड कांस्टेबल यम बहादुर थापा, कांस्टेबल डी संतोष कुमार, कांस्टेबल सुखविंदर सिंह, कांस्टेबल श्याबीर सिंह, की भी शौर्यगाथाएं शामिल हैं, जिन्होंने 2001 में हुए संसद हमले को विफल करने में अनुकरणीय वीरता का परिचय दिया था।

पुस्तक में सर्वोच्च शांति काल वीरता पुरस्कार-अशोक चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र प्राप्त कर्ताओं की वीरगाथाएं हैं। चूंकि सीआरपीएफ वर्षों से शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मिशन पर विदेश में भी तैनात रही है, इसलिए वहां की धरती से जुड़ी शौर्यगाथा को भी इस पुस्तक में शामिल किया गया है। 

डीजी डॉ ए.पी. महेश्वरी ने इस विस्तृत संकलन के लिए टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ये सच्ची कहानियां हमारी विरासत हैं। प्रत्येक नागरिक को इन कहानियों के बारे में जानने और उन पर गर्व करने का अधिकार है।पुस्तक में ऑपरेशन्स की सूक्ष्म जानकारियों व दूसरे विवरण को गहन विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक केवल ऑपरेशन की कार्रवाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इन वीरों के व्यक्तिगत जीवन और भावनाओं तक भी पहुंचती है। आमतौर पर ये पहलू अनदेखे और अनछुए रह जाते हैं।


निडर योद्धाओं के जीवन के दिलचस्प किस्सों का जिक्र भी इस पुस्तक में किया गया है। देश के नागरिकों को समर्पित और कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान करने वालों वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करती यह पुस्तक वीरता के लिए श्रद्धा, सटीकता के लिए निष्ठा और सबसे महत्वपूर्ण उस जुनून के साथ लिखी गई है, जो हर देश भक्त के दिल में धधकता है।

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