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अरावली की पहाड़ियों को नुकसान पहुंचाया तो मुसीबत में होगी हरियाणा सरकार
Sat, 09 Mar 2019 04:29 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 09 Mar 2019 04:29 AM IST
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मनोहर लाल खट्टर (फाइल)
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अरावली की पहाड़ियों या वन क्षेत्र के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार को चेतावनी दी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि उसने निर्माण की अनुमति देने के लिए कानून में संशोधन करके अरावली की पहाड़ियों या वन क्षेत्र को कोई भी नुकसान पहुंचाया तो वह खुद मुसीबत में होगी।
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न्यायाधीश अरुण मिश्रा और न्यायाधीश दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि हमारा सरोकार अरावली को लेकर है। बता दें कि पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब हरियाणा सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह अदालत को संतुष्ट करेंगे कि पंजाब भूमि संरक्षण कानून - 1900 में संशोधन किसी की मदद के लिए नहीं किए गए हैं। पीठ ने तुषार मेहता से कहा कि हम आपसे कह रहे हैं कि यदि आपने अरावली या वन के साथ या कांत एन्क्लेव के साथ कुछ किया तो आप ही मुसीबत में होंगे।
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इससे पहले पीठ ने एक मार्च को भूमि संरक्षण कानून में संशोधन करने के लिए हरियाणा सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि अदालत की अनुमति के बिना राज्य सरकार इस पर काम नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि हरियाणा विधानसभा ने 27 फरवरी को कानून में संशोधन पारित करके हजारों एकड़ वन भूमि क्षेत्र गैर वानिकी और रियल इस्टेट की गतिविधियों के लिए खोल दिया था। गौर करने वाली बात यह है कि उक्त इलाका एक सदी से भी अधिक समय से भूमि संरक्षण कानून के तहत संरक्षित था। राज्य विधान सभा ने विपक्षी दलों के सदस्यों के भारी विरोध के बीच ये संशोधन पारित किए थे।
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