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जम्मू-कश्मीर में पिछले एक साल में 57 फीसदी बढ़े आईईडी विस्फोट 

Mon, 18 Feb 2019 04:54 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Mon, 18 Feb 2019 04:54 AM IST
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IED blast in Jammu and Kashmir up 57 percent in last one year
सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच साल में आईईडी और अन्य बम विस्फोटों में बढ़ोतरी देखी गई है। आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए नक्सलियों और पूर्वोत्तर के उग्रवादियों की रणनीति को अपना लिया है। राज्य में 2018 से अब तक आईईडी विस्फोटों में 57 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं दूसरी तरफ नक्सल प्रभावित इलाकों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में ऐसे धमाकों में तेजी से कमी आई है। 

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यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के राष्ट्रीय बम डाटा सेंटर (एनबीडीसी) द्वारा दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेश की गई रिपोर्ट से मिली। एलीट ‘ब्लैक कैट कमांडो फोर्स’ का एनबीडीसी विंग देश में होने वाले सभी तरह की आईईडी और अन्य बम धमाकों का ब्योरा रखती है और धमाकों के बाद जांच को भी अंजाम देती है। पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आत्मघाती हमले की जांच भी इसी विंग की टीम कर रही है। 
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रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में आईईडी व अन्य विस्फोटकों के कारण बढ़े खतरे पर विशेष जोर दिया गया है। इसके मुताबिक, राज्य में आईईडी विस्फोट की घटनाओं में 2017 में 21 फीसदी, 2018 में 33 फीसदी और अब तक कुल 57 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके उलट उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसी दौरान ऐसी वारदातों में 52 फीसदी की कमी आई है।
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राष्ट्रीय स्तर पर मृतकों की संख्या घटी, कश्मीर में बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बम धमाके घटने से राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाओं में मृतकों की संख्या घटी है। इसके उलट इसी दौरान जम्मू-कश्मीर में ऐसी घटनाओं से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2017 में देश में 244 आईईडी धमाके हुए, जिनमें 61 लोगों को जान गंवानी पड़ी। वहीं पिछले साल 174 घटनाओं में 108 लोगों की मौत हुई। जम्मू-कश्मीर में 2017 में आईईडी विस्फोट से महज एक जान गई थी, वहीं 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 13 हो गया। 


आतंकियों के पास हाई ग्रेड स्तर का विस्फोटक

रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर सीधे बम फेंकने की रणनीति पर चलने वाले कश्मीरी आतंकियों ने छिपकर आईईडी धमाके करने पर निर्भरता बढ़ाई है। रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि आतंकियों के पास मौजूद विस्फोटक सेना के पास मिलने वाले ‘हाई ग्रेड’ स्तर का है।

ऐसे बढ़ी हैं जम्मू-कश्मीर में घटनाएं

37 बम धमाकों की वारदातें हुईं 2014 में
46 घटनाएं 2015 में और 69 घटनाएं दर्ज की गईं 2016 में
70 हुआ आंकड़ा बढ़कर 2017 में और 117 धमाके हुए 2018 में

देश के अन्य क्षेत्रों का आंकड़ा

98 घटनाएं हुईं थीं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 2017 में
77 घटनाएं घटकर रह गईं 2018 के दौरान इन क्षेत्रों में
66 घटनाएं हुईं थीं उत्तर-पूर्वी राज्यों में 2017 में
32 घटनाएं दर्ज की गईं इन राज्यों में साल 2018 में

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