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स्कूलों की मनमर्जी : फीस जमा नहीं कराई तो मुंबई के ICSE विद्यालय ने बच्चों को घंटों लैब में बैठाया, प्राचार्य व शिक्षकों पर केस
Wed, 06 Apr 2022 07:29 AM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 06 Apr 2022 07:29 AM IST
सार
दरअसल शिकायतकर्ता पालक व अन्य अभिभावकों ने कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020-21 व 2021-22 में जब स्कूल बंद थे, उस दौरान फीस वसूली को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में पिछले माह केस दायर किया है। इससे स्कूल प्रबंधन खफा है।
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स्कूली बच्चे (फाइल फोटो)
- फोटो : फाइल
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विस्तार
फीस वसूली को लेकर स्कूल प्रबंधन की निरंकुशता के मामले फिर सामने आने लगे हैं। अब मुंबई में एक ICSE स्कूल ने फीस बकाया होने पर 15-20 बच्चों को घंटों लैब बैठने की सजा दी। एक छात्रा के पिता ने इसे लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने स्कूल के प्राचार्य व दो शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
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यह मामला मुंबई के कांदिवली स्थ्ज्ञित कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल का है। दरअसल शिकायतकर्ता पालक व अन्य अभिभावकों ने कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020-21 व 2021-22 में जब स्कूल बंद थे, उस दौरान फीस वसूली को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में पिछले माह केस दायर किया है। इससे स्कूल प्रबंधन खफा है।
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एफआईआर कराने वाले छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी 14 साल की बेटी कक्षा नवीं में पढ़ती है। वह नए शिक्षण सत्र के पहले दिन 1 अप्रैल को सुबह 7.30 बजे स्कूल गई थी। इस पर उसके कक्षा अध्यापक ने उसे व एक अन्य छात्रा को एचओडी से मिलने को कहा। एचओडी ने दोनों छात्राओं को फिजिक्स लैब में बैठने का निर्देश दिया। इसके बाद कक्षा नवीं व दसवीं के कुछ अन्य विद्यार्थी लैब में भेजे गए। उनमें से कुछेक को तो परीक्षा में बैठने दिया गया, जबकि 10-15 को वहीं बैठने को कहा गया।
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इसके बाद प्राचार्य लैब में आए और उन्होंने विद्यार्थियों से बात की। इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे तक इन बच्चों को लैब में ही बैठाकर रखा गया। शिकायतकर्ता पालक ने कहा है कि स्कूल का यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है और इससे उनकी बच्ची को मानसिक प्रताड़ना हुई।
कांदिवली पुलिस ने स्कूल के प्राचार्य व दो शिक्षकों के खिलाफ किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) कानून 2015 के तहत केस दर्ज किया है। जांच के बाद मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में स्कूल प्रबंधन या प्राचार्य की प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
बता दें, कोरोना काल में स्कूल बंद रहने व इस दौरान आनलाइन पढ़ाई होने के बाद भी देशभर के निजी स्कूलों द्वारा फीस वसूली को लेकर कई मामले सामने आए हैं। इस लेकर कई राज्यों में हाईकोर्ट में केस दायर किए गए हैं। मध्य प्रदेश में इस अवधि का स्कूल बस व खाने का खर्च कम कर शिक्षण शुल्क लेने का निर्देश दिया गया है।