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लड़ेंगे कोरोना से: अब 'ओरल वैक्सीन' से महामारी को मात देने की कोशिश, जर्मनी की मदद से तैयार होगी दवा
Mon, 05 Jul 2021 08:08 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 05 Jul 2021 08:08 PM IST
सार
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय हैजा और आंत्र रोग संस्थान (आईसीएमआर-एनआईसीईडी) ने कोविड-19 के एक 'ओरल' टीके पर अनुसंधान करने के लिए एक प्रस्ताव सौंपा है। संस्थान की एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
आईसीएमआर-एनसीईडी की निदेशक शांता दत्ता ने बताया कि प्रस्तावित अनुसंधान परियोजना पर एक जर्मन कंपनी के सहयोग से कार्य किया जाएगा और इसे प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया है।
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उन्होंने कहा कि कोविड-19 का यह टीका विकसित होने पर पोलियो के टीके की तर्ज पर 'ड्रॉप' के रूप में इसकी भी खुराक दी जा सकेगी। वर्तमान में कोविड का टीका इंजेक्शन के जरिए लगाया जाता है।
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दत्ता ने कहा, हमने एक ओरल टीके के लिए प्रस्ताव सौंपा है। इसे मंजूरी मिलने और धन उपलब्ध कराए जाने पर काम शुरू किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में ओरल टीका विकसित करने में पांच-छह साल का समय लगेगा। दत्ता ने कहा कि विकसित हो जाने पर पहले जंतुओं पर इसका परीक्षण किया जाएगा, जैसा कि हर टीके का किया जाता है।
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उन्होंने कहा, ‘समूची प्रक्रिया में कम से कम से छह साल का समय लगेगा और उसके बाद ही हम बाजार में ओरल टीके उपलब्ध होने की उम्मीद कर सकते हैं।’