आईसीएमआर: कोरोना वायरस का भारतीय स्वरूप अब तक नहीं आया सामने
- एक अध्ययन में यह दावा किया गया कि कोरोना वायरस के ब्रिटेन स्ट्रेन की तुलना में भारत में फैला स्ट्रेन सबसे ज्यादा है प्रभावी।
- महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में अब तक देसी स्वरूप की वजह से मामले बढ़ने की पुष्टि नहीं हुई।
- आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा, कोरोना वायरस का कोई भारतीय स्वरूप नहीं है।
विस्तार
कोरोना वायरस के एक बार फिर बढ़ते मामलों को लेकर जहां नए-नए स्वरूप (वैरिएंट) को मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि अब तक कोरोना वायरस का कोई भारतीय स्वरूप सामने नहीं आया है। इससे पहले एक अध्ययन में यह दावा किया गया कि कोरोना वायरस के ब्रिटेन स्ट्रेन की तुलना में भारत में फैला स्ट्रेन सबसे ज्यादा प्रभावी है।
महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में देसी स्वरूप की वजह से मामले बढ़ने की पुष्टि नहीं
भार्गव ने कहा कि कोरोना वायरस का कोई भारतीय स्वरूप नहीं है। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में अब तक देसी स्वरूप की वजह से मामले बढ़ने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर कोई नया स्वरूप मिलता भी है तो भी घबराने की बात नहीं है क्योंकि हमारे देश में टीकाकरण में शामिल कोवाक्सिन और कोविशील्ड दोनों ने ब्रिटेन व ब्राजील के स्वरूप के खिलाफ अपना असर दिखाया है। जबकि दक्षिण अफ्रीकी स्वरूप की वैक्सीन पर अभी भी काम चल रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण का कहना है कि जब भी कोई वायरस अपनी जगह से शिफ्ट होता है, तो वह महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजरता है। इसलिए वैक्सीन का इस पर असर करना जरूरी होता है जिससे ये पता चल सके कि वायरस के खिलाफ वैक्सीन कारगर है या नहीं।
टीके की बर्बादी एक फीसदी तक लाने का लक्ष्य
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों के साथ बैठक में वैक्सीन की खुराक को बर्बादी से बचाने के लिए राज्यों को सख्त योजना पर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब छह फीसदी डोज बर्बाद हो चुकी है। अब राज्यों को उनके खर्च के मुताबिक ही टीके मिलेंगे ताकि ओवर स्टॉक के चलते डोज बर्बाद न हो सकें।
इसके अलावा एक्सपायरी डेट को लेकर भी सतर्कता बरतना जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ और उच्चाधिकार समूह (कोविड टीकाकरण) के अध्यक्ष डॉ. आरएस शर्मा ने राज्यों को टीके की खुराक की बर्बादी को घटाकर एक फीसदी से कम पर लाने का लक्ष्य दिया।
वायरस के नए स्वरूपों को पहचान सकते हैं टी-सेल
कोरोना से लड़ाई के लिए मौैजूदा टीके नए म्यूटेशन पर भी कारगर हो सकते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक कोरोना को मात देने वाले मरीजों के इम्यून सिस्टम के टी सेल ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील वाले वायरस के स्वरूप को पहचान कर पाने में सफल रहे। अध्ययन में अमेरिका के हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसंधानकर्ता भी शामिल थे।
ओपन फोरम इन्फेक्शियस डिजीज में छपे शोध के मुताबिक वायरस से नए स्वरूपों के मिलने से पहले वैज्ञानिकों ने 30 लोगों के रक्त का सैंपल लेकर विश्लेषण किया। ये लोग कोरोना को मात देने में कामयाब रहे थे। इसमें पता चला कि कोरोनो वायरस की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में एक प्रमुख रूप से जिम्मेदार सीडी8+ टी कोशिकाएं वायरस के खिलाफ सक्रिय रही।
इससे यह पता चलता है कि वर्तमान टीके कुछ सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। इससे पहले के अध्ययन में यह बात सामने आ रही थी कि वायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन से एंटीबॉडीज और टी कोशिकाओं द्वारा पहचान करने में कम योग्य बना सकते हैं।