Chandrayaan: पृथ्वी से दूर ले जाया जा रहा चंद्रयान, प्रक्रिया शुरू; सोमनाथ बोले- रॉकेट को बच्चे जैसा मानता हूं
इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने रॉकेटों के प्रति अपना गहरा प्रेम और जुड़ाव दिखाया है। उन्होंने कहा कि वह रॉकेट को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। उन्होंने कहा कि कल जब चंद्रयान -3 का प्रक्षेपण किया जा रहा था तो मैं बेहद खुश था। उस समय रॉकेट कितना सुंदर दिख रहा था।
विस्तार
बेंगलुरु में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक चंद्रयान-3 पर लगातार नजर रख रहे हैं। इस बीच, सामने आया है कि चंद्रयान-3 की पहली कक्षा पूरी हो गई है। मतलब उसकी पहली कक्षा बदल दी गई है। वहीं, इसरो के वैज्ञानिकों ने यह भी बताया है कि 41 दिन बाद 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की तैयारी के क्रम में चंद्रयान-3 की पृथ्वी के साथ दूरी बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए चंद्रयान-3 पर लगाए गए थ्रस्टर्स को फायर करना शुरू कर दिया गया है। इनके जरिए 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग के लिए चंद्रयान -3 को पृथ्वी से दूर ले जाया जाएगा। शनिवार को तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर ने इसकी जानकारी दी है।
बदली गई चंद्रयान की कक्षा
चंद्रयान-3 की पहली कक्षा सफलतापूर्वक बदल दी गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 को पृथ्वी की अगली और बड़ी कक्षा में भेज दिया है। इसरो ने शनिवार दोपहर यान की कक्षा में बदलाव किया। इसरो ने बताया कि चंद्रयान-3 को प्रक्षेपण के बाद 36,500 किलोमीटर की कक्षा में डाला गया था। शनिवार को उसकी लंबी दूरी बढ़ाकर 41,762 किलोमीटर की अंडाकार परिधिवाली कक्षा में डाल दिया गया है। यह ऐसी कक्षा है जो पृथ्वी से निकटम होने पर 173 किमी पर है और सबसे दूर होने पर 41,762 किमी पर है। इसरो ने सोशल मीडिया पोस्ट पर बताया कि यान की सेहत बिल्कुल सामान्य है। उसके सभी उपकरण सही से काम कर रहे हैं।
Chandrayaan-3 Mission update | "The spacecraft's health is normal. The first orbit-raising manoeuvre (Earthbound firing-1) is successfully performed at ISTRAC/ISRO, Bengaluru. Spacecraft is now in 41762 km x 173 km orbit," tweets ISRO
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(Pic Source: Twitter handle of ISRO) pic.twitter.com/0sbinb4P8Q — ANI (@ANI) July 15, 2023
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस उन्नीकृष्णन नायर ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि प्रक्षेपण यान ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया है और चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के लिए आवश्यक शुरुआती स्थितियां एकदम सटीक रही हैं। नायर ने कहा, ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स को फायर किया जा रहा है जो चंद्रयान-3 को पृथ्वी की अगली कक्षा में ले जाएगा।
उन्होंने बताया कि चूंकि प्रयोग का पहला चरण सौ फीसदी सफल रहा है, और अंतरिक्ष यान बहुत अच्छी स्थिति में नजर आ रहा है। इसलिए आगे के चरण में प्रोपल्शन और ऑनबोर्ड लॉजिक के जरिये इसके चंद्रमा की सतह पर सफलता के साथ उतरने की पूरी उम्मीद है। सतीश धवन स्पेस सेंटर के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वैज्ञानिक रॉकेट को अगली कक्षाओं में बढ़ाने की प्रक्रिया में व्यस्त हैं।
रॉकेट को अपने बच्चों की तरह मानता हूं- एस सोमनाथवहीं, इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने रॉकेटों के प्रति अपना गहरा प्रेम और जुड़ाव दिखाया है। उन्होंने कहा कि वह रॉकेट को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। उन्होंने कहा कि कल जब चंद्रयान -3 का प्रक्षेपण किया जा रहा था तो मैं बेहद खुश था। उस समय रॉकेट कितना सुंदर दिख रहा था।
आईआईटी हैदराबाद के 12वें दीक्षांत समारोह में संबोधन देते हुए सोमनाथ ने कहा कि एक इंजीनियर और वैज्ञानिक के रूप में मुझे रॉकेट से प्यार है। मैं रॉकेट को एक बच्चे की तरह मानता हूं। मैं उसके जन्म, उसके विकास, उसके विकास की समस्याओं को देखता हूं।
इस दौरान उन्होंने चंद्रयान-2 प्रक्षेपण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उसमें लगभग 2,000 मापक थे जो समन्वित थे। इसरो ऐसे हजारों मापकों को ग्राफ और मॉडलों में बदलता है उनके अध्ययन के बाद बताता है कि यह कैसा प्रदर्शन करता है।
इस दौरान रोबोट को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजने के सवाल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि रोबोट को अंतरिक्ष में भेजने की कठिनाइयों में से एक यह है कि रोबोट में संवेदी धारणा और भावनाओं का अभाव है जो अनुभवों और परिणामी निर्णय लेने की प्रक्रिया से उत्पन्न होती हैं।