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कोविड-19: रिपोर्ट में दावा, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन-एजीथ्रोमाइसिन का सेवन हो सकता है घातक
Tue, 26 May 2020 06:20 PM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Tue, 26 May 2020 06:20 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
कोरोना महामारी से रोकथाम और उसके इलाज के लिए अभी तक किसी भी तरह की दवा या टीके का निर्माण नहीं किया जा सका है। हालांकि दुनियाभर में अलग-अलग दवाओं के मिश्रण से इसके प्रभाव को कम करने के कई दावे किए गए हैं। इसमें भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसके समर्थन के बाद इसकी मांग दुनियाभर में बढ़ गई।
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हालांकि अब कई अलग-अलग रिपोर्ट्स में इन दवाओं को घातक बताया जा रहा है और कोरोना के मरीजों पर इस्तेमाल ना करने की हिदायत दी जा रही है। ऐसी ही एक रिपोर्ट वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रस्तावित हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन का साथ में सेवन घातक हो सकता है और यह मिश्रण ह्रदय तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है।
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अमेरिका की इन दोनों यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) डेटाबेस का अवलोकन, पूर्वव्यापी आकलन किया जिसमें दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव संबंधी 2.1 करोड़ केस रिपोर्ट थी। इन रिपोर्टों में 14 नवंबर 1967 और एक मार्च 2020 के बीच 130 देशों की इलाज की रिपोर्टें शामिल थीं।
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रिपोर्ट में जिन मरीजों ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, एजीथ्रोमाइसिन ली या दोनों दवाओं का सेवन किया उनके दिल पर दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव का अध्ययन किया गया। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और एजीथ्रोमाइसिन अकेले या साथ में लेना प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यत: एजीथ्रोमाइसिन लेकिन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के सेवन से भी ह्रदय की गति में बदलाव जैसे घातक प्रभाव देखने को मिले हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों के साथ में सेवन से और भयंकर प्रभाव देखने को मिले। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का कई महीनों तक सेवन करने से जानलेवा दिल का दौरा पड़ने जैसा असर भी देखा गया। बता दें कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाओं का सेवन मुख्य रूप से मलेरिया के मरीजों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और भारत में इसका निर्माण बड़ी संख्या में होता है।