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तेलंगाना-आंध्र में बेचे गए 50 से अधिक बच्चे: मानव तस्कर गिरोह का भंडाफोड़, खुले कई राज, 16 को कराया गया आजाद

Thu, 30 May 2024 05:25 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, हैदराबाद
अमर उजाला नेटवर्क, हैदराबाद Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 30 May 2024 05:25 AM IST
सार

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी शोभारानी, सलीम और स्वप्ना से मिली जानकारी के आधार पर एक सिक्योरिटी गार्ड हरिहर चेतन बंडारी को गिरफ्तार किया गया, जो इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है।

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Human trafficking gang More than 50 children sold in Telangana-Andhra
police - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तेलंगाना के राचकोंडा में जिस मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, वह गिरोह अब तक 50 से ज्यादा बच्चों को बेच चुका है। ज्यादातर बच्चे दिल्ली और पुणे से खरीदकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बेचे गए। पुलिस अब गैर कानूनी तरीके से बच्चों को खरीदने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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राचकोंडा पुलिस आयुक्त तरुण जोशी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अब तक 16 बच्चों को बचाया गया है। इनमें से 4 लड़के और 12 लड़कियां हैं। बचाए गए बच्चों की उम्र 23 दिन से 2 वर्ष है। अब इन मासूमों को इनके असली माता-पिता को सौंपने की तैयारी की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पुणे, दिल्ली व हैदराबाद से अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली में बच्चों की खरीद का काम किरण और प्रीति करती थीं, जबकि पुणे में कन्हैया बच्चों को खरीदता था। इनसे पूछताछ के बाद तीन और नाम सामने आए है, जो अभी फरार है। उनकी गिरफ्तारी के लिए दिल्ली व पुणे पुलिस से संपर्क किया गया है।

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सिक्योरिटी गार्ड हरिहर गिरोह का सरगना
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी शोभारानी, सलीम और स्वप्ना से मिली जानकारी के आधार पर एक सिक्योरिटी गार्ड हरिहर चेतन बंडारी को गिरफ्तार किया गया, जो इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। चेतन से पूछताछ के आधार पर पद्मा बंडारी, सरोजा बालगम, सारदा मुडावत, राजू मुडावत, मुमताज पठान, अनुराधा जगननादम और ममता याटा को गिरफ्तार किया गया है।

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बच्चों के बेहतर भविष्य का देते थे झांसा : दिल्ली में गरीब परिवारों से बच्चे खरीदने वाली प्रीति और किरण ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे गरीब परिवारों की उन महिलाओं को निशाना बनाती थीं, जिनके घर अनचाही संतान पैदा होती थीं। फिर उन गरीब महिलाओं को झांसा दिया जाता था कि उनके बच्चों की बड़े घरों में बेहतर परवरिश होगी। साथ ही जिन अमीर परिवारों को आपका बच्चा दिया जाएगा, वे जरूरत पड़ने भविष्य में उनकी आर्थिक मदद कर सकते हैं।

एक फोन कॉल से हुआ गिरोह का भंडाफोड
राचकोंडा पुलिस आयुक्त तरुण जोशी ने बताया कि 22 मई को मेडचेल जिले में मेडिपल्ली थाना क्षेत्र की पुलिस को मण्यम साई नाम के एक व्यक्ति ने फोन कर सूचना दी कि उनके थाना क्षेत्र में पीरजादीगुड़ा में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र के आसपास एक गिरोह एक बच्ची को बेच रहा है। पुलिस ने सूचना के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पीरजादीगुड़ा से दो बच्चियों के साथ शोभारानी, सलीम और स्वप्ना को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ के आधार पर दिल्ली से प्रीति और किरण व पुणे से कन्हैया को गिरफ्तार किया गया। अभी तीन आरोपी फरार है।

सामान की तरह खरीद-फरोख्त
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि बच्चों को किसी सामान की तरह मोलभाव कर खरीदा और बेचा जाता था। बच्चों की कीमत उनकी उम्र, सेहत और रूप-रंग के आधार पर तय की जाती थी। बहुत छोटे और बीमार बच्चों को 50 हजार रुपये में और 1 से 2 साल तक के स्वस्थ बच्चों को 1 से 1.5 लाख रुपसे के बीच में खरीदा जाता था। इसके बाद जब बेचा जाता था, तो न्यूनतम कीमत 1.5 लाख रुपये रखी जाती थी। इसके अलावा बड़े स्वस्थ बच्चों को 5-6 लाख रुपये तक में बेचा जाता था।

 

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