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Human Rights Day: सीजेआई खन्ना बोले- समाज की नींव हैं मानवाधिकार, वैश्विक शांति के लिए इनका होना जरूरी

Tue, 10 Dec 2024 11:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 10 Dec 2024 11:05 PM IST
सार

Human Rights Day: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने मंगलवार को कहा कि मानवाधिकार मानव समाज की नींव हैं, जो वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आश्यक हैं।

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"Human rights the bedrock of society, imperative for global peace": CJI Khanna
सीजेआई संजीव खन्ना। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने मंगलवार को कहा कि मानवाधिकार मानव समाज की नींव हैं, जो वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आश्यक हैं। यह बयान उन्होंने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र (यूडीएचआर) की 76वीं वर्षगांठ के मौके पर दिया। न्यायमूर्ति खन्ना ने इस मौके पर कहा कि हमारे देश के आपराधिक कानून में सुधार की आवश्यकता है। 

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मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय जेलों में बढ़ती हुई कैदियों की संख्या पर चिंता जताई और कहा कि हमारे देश में विचाराधीन कैदियों की संख्या राष्ट्रीय क्षमता से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, हमारे जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या 5 लाख 19 हजार है। जबकि देश की क्षमता केवल 4 लाख 36 हजार है। उन्होंने कहा कि इस पर न्यायिक सुधार की जरूरत है और यह बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, जब हम यह देखते हैं कि जेलों में असंख्य विचाराधीन कैदी हैं। 
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न्यायमूर्ति खन्ना ने 'ब्लैक कोट सिंड्रोम' पर भी चर्चा की।  ब्लैक कोट सिंड्रोम एक मानसिक स्थिति है, जो उन लोगों में देखी जाती है, जो समाज में हाशिए पर होते हैं। जब ये लोग न्यायालय या कानूनी प्रक्रिया से जुड़ते हैं, तो वे न्यायाधीशों और वकीलों से डर महसूस करते हैं या फिर उनसे परायापन का अनुभव करते हैं। इसकी वजह से यह होता है कि वह महसूस करते हैं कि न्यायाकि व्यवस्था उनके साथ नाइंसाफी कर सकती है या उनके लिए न्याय मिलना मुश्किल हो सकता है। 
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उन्होंने कहा कि एक सहानुभूतिपूर्ण और मानवतावादी न्याय प्रणाली की आवश्यकता है। मानवाधिकार दिवस 2024 के अवसर पर राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने इस विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद थे। इस मौके पर कानून मंत्री मेघवाल ने कहा, मानवाधिकार केवल विचार नहीं हैं, बल्कि ये उस नींव की तरह हैं, जिस पर हम एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करते हैं। 

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