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Hindi News ›   India News ›   How night curfew affect the UP elections? From putting up banners, posters to mobilizing the crowd, the night is special for election 

UP elections: बैनर,पोस्टर लगाने से लेकर भीड़ जुटाने तक चुनाव के लिए खास होती है रात; नाइट कर्फ्यू का यूपी चुनाव पर पड़ेगा कितना असर?

Fri, 24 Dec 2021 02:50 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 24 Dec 2021 02:50 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में कोविड के बढ़ते मामलों के बीच रात का कर्फ्यू लगाया गया है। ऐसे में राजनैतिक संगठनों से लेकर उनके कार्यकर्ताओं के बीच सवाल है कि आखिर रात वाली "चुनावी हलचल" कैसे चलेगी। कर्फ्यू का असर चुनाव की तैयारियों के साथ ही प्रचार पर भी पड़ने की आशंका है।

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How night curfew affect the UP elections? From putting up banners, posters to mobilizing the crowd, the night is special for election 
लखनऊ कर्फ्यू - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। वहीं, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते प्रदेश में  रात का कर्फ्यू लगा दिया गया है। कर्फ्यू रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक रहेगा। ऐसे में राजनैतिक संगठनों से लेकर उनके कार्यकर्ताओं के बीच सवाल है कि आखिर रात वाली "चुनावी हलचल" कैसे चलेगी। वैसे भी कहा जाता है चुनावी रणनीतियां रात को ही बनती हैं। ये रणनीतियां चुनाव को पलट कर रख देती हैं।  

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उत्तर प्रदेश में चुनाव समीक्षक और कानपुर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के पूर्व प्रवक्ता जेएन सिंह कहते हैं कि सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के किसी भी राज्य में होने वाले चुनावों में रात की बड़ी अहमियत होती है। ग्रामीण इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखा जाता है। ग्रामीण इलाकों में चुनाव का मोमेंटम सबसे ज्यादा रातों को ही दिखता है। ऐसे में रात्रिकालीन कर्फ्यू निश्चित तौर पर राजनीतिक पार्टियों के लिए एक झटका है।
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झंडा बैनर पोस्टर सब रात को लगाते हैं कार्यकर्ता
उत्तर प्रदेश प्रधान संगठन के पूर्व सचिव नीरज शुक्ला कहते हैं कि रात्रिकालीन कर्फ्यू तो ठीक है लेकिन दिन में होने वाली रैलियां भी और जनसभाओं से क्या संक्रमण की दर नहीं बढ़ेगी। अगर वास्तव में सरकार संक्रमण की दर को रोकना चाहती है तो रात ही नहीं बल्कि दिन में भी प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।
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शुक्ला कहते हैं कि दशकों से चुनाव की तैयारियों को अमलीजामा पहनाने की रणनीतियां हों या फिर कार्यकर्ताओं द्वारा झंडा, बैनर, पोस्टर लगाना सब रात को ही होता है। ऐसे में रात को लगने वाले कर्फ्यू को अगर प्रशासन पूरी सख्ती से लागू करवाएगा तो निश्चित तौर पर चुनावों में बड़ा असर देखने को मिलेगा।  

सख्ती से मॉनिटरिंग हुई तो चुनाव प्रचार पर लगेगा ब्रेक
उत्तर प्रदेश की राजनीति को बेहद करीब से समझने वाले राजनैतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि चुनाव के दौरान रात में जो तैयारियां होती हैं उसके लिए राजनीतिक पार्टी और कार्यकर्ता दिन-रात दौड़ते रहते हैं। ऐसे में रात के कर्फ्यू की वजह से लगने वाले ब्रेक से निश्चित तौर पर चुनावी अभियान पर असर तो पड़ता ही है। प्रशासन और अन्य जिम्मेदार महकमों को ज्यादा अलर्ट और सजग रहना होगा। क्योंकि रात के कर्फ्यू की मॉनिटरिंग उस तरीके से नहीं होती है जिस तरीके से लॉकडाउन या संपूर्ण कर्फ्यू के वक्त दिन में ही मॉनिटरिंग होती है।


समाजशास्त्री डॉ भास्कर कहते हैं कि सिर्फ कागजों पर नाइट कर्फ्यू ना हो तो उसका असर भी दिखेगा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सरकार महज खानापूर्ति के लिए ही रात्रिकालीन कर्फ्यू का ऐलान करती है। वो कहते हैं कि सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस महामारी से लड़ना है। इसलिए सरकार की साफ नियति का तो साथ देना है लेकिन इसमें पक्षपात जैसा कुछ ना हो।

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