फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   How Indian will come Top in qs world university ranking, when teachers are not ready for UGC arpit

दुनिया के टॉप शिक्षण संस्थाओं में कैसे आएगा भारत? जब टीचर्स ही ट्रेनिंग के लिए कर रहे आनाकानी

Mon, 16 Sep 2019 03:41 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 16 Sep 2019 03:41 PM IST
सार

  • पिछले वर्ष के ट्रेनिंग प्रोग्राम में 15 लाख शिक्षकों में से केवल 6411 ने हिस्सा लिया
  • इनमें से केवल 3807 शिक्षक ही इस प्रोग्राम को पास कर सके

विज्ञापन
How Indian will come Top in qs world university ranking, when teachers are not ready for UGC arpit
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (फाइल फोटो)

विस्तार

'क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग-2018' में दुनिया की शीर्ष 200 उच्च शिक्षण संस्थाओं में भारत की केवल तीन संस्थाओं ने अपनी जगह बनाने में कामयाबी पाई थी। भारत की शिक्षण संस्थाओं के विश्व स्तर पर पिछड़े होने के पीछे शिक्षकों का नवीनतम तकनीकी से स्वयं को अपडेट न करना प्रमुख वजह मानी जाती है। इसे देखते हुए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने पिछले वर्ष से शिक्षकों को उनके क्षेत्र में हुई नवीनतम खोज से परिचित कराने के लिए 'अर्पित' नाम से कार्यक्रम शुरु किया था।

विज्ञापन


लेकिन पाया गया कि लगभग 15 लाख उच्च शिक्षकों में से केवल 6411 ने ही ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया। इनमें से केवल 3807 शिक्षक ही इस ट्रेनिंग प्रोग्राम को पास कर सके।

विज्ञापन

शिक्षकों में उत्साह नहीं

इस वर्ष भी यूजीसी ने शिक्षकों की योग्यता बढ़ाने के लिए अर्पित प्रोग्राम लांच कर दिया है। इसमें 'लीप' के नाम से तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोग्राम भी शामिल है। अभी तक इस कार्यक्रम को लेकर भी शिक्षकों ने ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया है। यूजीसी के लिए यह ट्रेंड चिंता का विषय बना हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कैसे सुधरेगा शिक्षकों का स्तर

यूजीसी के एक अधिकारी ने बताया कि नवीनतम तकनीकी से लैस हुए बिना शिक्षक छात्रों को भावी प्रतिस्पर्धा के योग्य नहीं बना सकेंगे। यही कारण है कि शिक्षकों के ट्रेनिंग प्रोग्रााम को उनकी पदोन्नति से जोड़ दिया गया है। इस सुझाव पर भी विचार हो रहा है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होना अनिवार्य कर दिया जाए। प्रोग्राम में शामिल न होने वाले शिक्षकों से कड़ाई बरती जाए। हालांकि, शिक्षकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीक का सहारा लेने पर भी विचार हो सकता है, जिससे दूरी शिक्षण कार्यक्रम में बाधा न बनें।

विश्व रैंकिंग में कहां हैं भारत की संस्थाएं

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग हर वर्ष विश्व की शीर्ष शिक्षण संस्थाओं की रैंकिंग जारी करती है। पिछले वर्ष जारी हुई रैंकिंग में पहले 100 स्थानों में भारत का कोई संस्थान शामिल नहीं था। टॉप 200 संस्थाओं में से भारत की केवल तीन संस्थाओं ने पहली बार इस लिस्ट में अपना स्थान बनाया था। आईआईटी दिल्ली इस लिस्ट में सबसे ऊपर 159वें स्थान पर, 179वीं रैंक पर आईआईटी बॉम्बे रही, इसके पहले वर्ष में उसकी रैंकिंग 219वीं था। वहीं, बंगलुरु का प्रतिष्ठित भारतीय विज्ञान संस्थान अपनी प्रतिष्ठा कायम नहीं रख सका था। वह पिछले वर्ष के 152वें स्थान से खिसककर 190वें स्थान पर पहुंच गया था।

'योग्य टीम न विकसित करना लीडर की कमी'

शिक्षकों की गुणवत्ता पर टिप्पणी करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को कहा कि योग्य शिक्षक ही देश को विश्व प्रतिस्पर्धा में चुनौती देने वाले योग्य छात्र दे सकते हैं, इसलिए शिक्षकों की ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। निशंक ने कहा कि एक सफल शिक्षक के पास टीम लीडर के सभी गुण होने चाहिए। अगर वह एक योग्य टीम नहीं विकसित कर पाता, तो यह टीम के खिलाड़ियों से ज्यादा कोच यानी शिक्षक की असफलता है। इस देश के छात्रों और अध्यापकों ने दिखाया है कि अगर उन्हें उचित अवसर दिया जाए तो वे शानदार सफलताएं अर्जित कर सकते हैं और सरकार इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed