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कैसे खींची गई ब्लैक होल की तस्वीर, जिसका था सालों से इंतजार
Thu, 11 Apr 2019 01:19 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Thu, 11 Apr 2019 01:19 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
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दुनिया के लिए बुधवार का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के नाम रहा। हम पहली दफा ब्लैक होल की तस्वीर देख सके। यह ब्लैक होल एम87 नामक आकाशगंगा में मौजूद है। इस तस्वीर में प्रकाश का एक चक्र दिख रहा है, जिसके बीच में ब्लैक होल है।
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ब्लैक होल...यूं समझें
ब्लैक होल अंतरिक्ष में ऐसी जगह है, जिसमें जाने के बाद कोई चीज बाहर नहीं आती। यहां तक कि प्रकाश भी नहीं। इसके अंग्रेजी नाम का हिंदी में अनुवाद करें तो यह काला छिद्र होगा। मगर यह वास्तव में कोई छिद्र या छेद नहीं है। यह तत्वों का घना मिश्रण माना जाता है, जिससे पैदा होने वाला गुरुत्वाकर्षण बल आसपास मौजूद सभी चीजों को अपनी ओर खींचता है। वैज्ञानिक 18वीं शताब्दी से इसे काला तारा मानकर इसके अस्तित्व को स्वीकारते थे, लेकिन किसी दूरबीन से इसे देखा नहीं जा सका था, न कभी इसकी तस्वीर सामने आई थी।
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फाइल फोटो
कैसे खींची गई तस्वीर
परियोजना के शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2017 में अमेरिका के एरिजोना और हवाई के साथ-साथ मैक्सिको, चिली, स्पेन और अंटार्कटिका में दूरबीनों का उपयोग करके पहला डेटा प्राप्त किया। टेलिस्कोप के वैश्विक नेटवर्क ने अनिवार्य रूप से एक ग्रह के आकार का अवलोकन तैयार किया। टीम के एक सदस्य मैकस्कोरा ने कहा कि टेलिस्कोप प्रति छेद ब्लैक होल को नहीं देख रहा है, लेकिन जिस सामग्री को उसने पकड़ा है, वह एक चमकदार डिस्क है, जिसे व्हाइट-हॉट गैस और प्लाज्मा कहा जाता है।
ब्लैक होल के पीछे की रोशनी लेंस की तरफ मुड़ी हुई है। "अभूतपूर्व छवि - इसलिए विज्ञान और विज्ञान कथाओं में अक्सर कल्पना की जाती है, छह अध्ययनों में विश्लेषण किया गया है जिसे 60-विषम संस्थानों के 200 विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने इस विकिरण की नकल की है, जिससे इसके खिलाफ ब्लैकहोल की छाया को देखने की उम्मीद की जा रही है।
परियोजना के शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2017 में अमेरिका के एरिजोना और हवाई के साथ-साथ मैक्सिको, चिली, स्पेन और अंटार्कटिका में दूरबीनों का उपयोग करके पहला डेटा प्राप्त किया। टेलिस्कोप के वैश्विक नेटवर्क ने अनिवार्य रूप से एक ग्रह के आकार का अवलोकन तैयार किया। टीम के एक सदस्य मैकस्कोरा ने कहा कि टेलिस्कोप प्रति छेद ब्लैक होल को नहीं देख रहा है, लेकिन जिस सामग्री को उसने पकड़ा है, वह एक चमकदार डिस्क है, जिसे व्हाइट-हॉट गैस और प्लाज्मा कहा जाता है।
ब्लैक होल के पीछे की रोशनी लेंस की तरफ मुड़ी हुई है। "अभूतपूर्व छवि - इसलिए विज्ञान और विज्ञान कथाओं में अक्सर कल्पना की जाती है, छह अध्ययनों में विश्लेषण किया गया है जिसे 60-विषम संस्थानों के 200 विशेषज्ञों द्वारा प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने इस विकिरण की नकल की है, जिससे इसके खिलाफ ब्लैकहोल की छाया को देखने की उम्मीद की जा रही है।
National Science Foundation (File)
मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के एसोसिएट प्रोफेसर सुदीप भट्टाचार्य ने भी इन तकनीकि पहलुओं का समर्थन किया है और कहा है कि यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे पास ब्लैकहोल के अस्तित्व के बारे में बहुत सारे साक्ष्य थे, जिसके चलते ये देखकर विश्वास हो रहा है।
National Science Foundation (File)
तस्वीर...5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर की
यह ब्लैक होल पृथ्वी से इतना दूर है कि हमें इस तक पहुंचने में 5 करोड़ प्रकाश वर्ष लग जाएंगे। या यूं कहें कि यह हमारी पृथ्वी से 5 मिलियन ट्रिलियन (पांच के आगे 20 बार शून्य लगा लीजिए) किमी दूर है। इस तस्वीर को आठ रेडियो टेलीस्कोप के जरिए तैयार किया गया। इन टेलीस्कोप इवेंट होराइजन के डायरेक्टर शेफर्ड डेअलमैन ने अमेरिका में इस तस्वीर को जारी करते हुए बताया कि यह तस्वीर पृथ्वी से चंद्रमा पर ली गई किसी कंकड़ की तस्वीर है।
यह ब्लैक होल पृथ्वी से इतना दूर है कि हमें इस तक पहुंचने में 5 करोड़ प्रकाश वर्ष लग जाएंगे। या यूं कहें कि यह हमारी पृथ्वी से 5 मिलियन ट्रिलियन (पांच के आगे 20 बार शून्य लगा लीजिए) किमी दूर है। इस तस्वीर को आठ रेडियो टेलीस्कोप के जरिए तैयार किया गया। इन टेलीस्कोप इवेंट होराइजन के डायरेक्टर शेफर्ड डेअलमैन ने अमेरिका में इस तस्वीर को जारी करते हुए बताया कि यह तस्वीर पृथ्वी से चंद्रमा पर ली गई किसी कंकड़ की तस्वीर है।