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Independence Day: गरीबी-कम साक्षरता से चांद-मंगल तक का सफर भारत ने कैसे तय किया, 79 साल में क्या-क्या बदला?

Fri, 14 Aug 2026 08:21 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 14 Aug 2026 08:21 PM IST
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सार
गरीबी से विकास और सीमित संसाधनों से तकनीकी आत्मनिर्भरता तक भारत ने लंबा सफर तय किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आय, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी में बदलाव के साथ अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी देश ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। लेकिन 79 साल में भारत ने कितना सफर तय किया? आइए जानते हैं।
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How Did India Travel from Poverty and Low Literacy to the Moon and Mars? What Changed in 79 Years?
आजादी के 80 साल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के समय भारत के सामने गरीबी, कम साक्षरता, कम आय, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं और सीमित बिजली-तकनीकी संसाधनों जैसी बड़ी चुनौतियां थीं। 1947 के आसपास के आंकड़ों और आज के उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो आबादी से लेकर शिक्षा, आय, रोजगार, स्वास्थ्य, बिजली, शहरीकरण और मोबाइल-इंटरनेट तक देश में बड़ा बदलाव आया है।  

आबादी का आंकड़ा
आबादी का आंकड़ा - फोटो : Amar Ujala

36 करोड़ की आबादी से करीब 148 करोड़ तक

1951 की पहली जनगणना में भारत की आबादी 36.11 करोड़ थी। इसमें करीब 18.55 करोड़ पुरुष और 17.56 करोड़ महिलाएं थीं। वर्ल्डओमीटर के अनुसार मौजूदा वक्त में भारत की आबादी करीब 147.82 करोड़ पहुंच चुकी है।

लिंग अनुपात में क्या बदलाव आया?

1951 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 946 महिलाएं थीं। 2011 की जनगणना में यह संख्या 943 रही। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के 2019-21 के आंकड़ों में यह अनुपात बढ़कर 1,020 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष हो गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 2026 में भारत में करीब 71.55 करोड़ महिलाएं और 76.11 करोड़ पुरुष होंगे। इस हिसाब से करीब 940 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष होने का अनुमान है।

साक्षरता दर
साक्षरता दर - फोटो : Amar Ujala

साक्षरता में सबसे बड़ा बदलाव

आजादी के समय भारत की साक्षरता दर सिर्फ 14 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता दर महज आठ प्रतिशत थी। पीएलएफएस 2025 के अनुसार अब 7 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में देश की साक्षरता दर 80.9 प्रतिशत है। महिलाओं की साक्षरता दर भी 74.9 प्रतिशत हो चुकी है।

प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा
प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा - फोटो : Amar Ujala

जेब में आने वाली आय कितनी बढ़ी?

1950-51 में भारत की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा कीमतों पर सालाना सिर्फ ₹265 थी। 2025-26 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय बढ़कर ₹2,07,598 सालाना हो गई। यानी आजादी के शुरुआती वर्षों की तुलना में प्रति व्यक्ति आय में बहुत बड़ा बदलाव आया है।

अर्थव्यवस्था का आंकड़ा
अर्थव्यवस्था का आंकड़ा - फोटो : Amar Ujala

राष्ट्रीय आय से जीडीपी तक का सफर

1948-49 में भारत की राष्ट्रीय आय ₹8,710 करोड़ आंकी गई थी। 2025-26 के अस्थायी अनुमानों के अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी ₹323.12 लाख करोड़ रही। 

गरीबी में बड़ी गिरावट

योजना आयोग (नीति आयोग) की रिपोर्ट के अनुसार, 1973-74 में भारत की 54.9% आबादी गरीबी रेखा से नीचे थी। विश्व बैंक के 2026 के नवीनतम अनुमान के अनुसार, 2023-24 में भारत की करीब 16.1% आबादी 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा से नीचे थी, जबकि अत्यधिक गरीबी में रहने वालों की संख्या करीब 2.6% थी।

काम करने वाली आबादी
काम करने वाली आबादी - फोटो : Amar Ujala

काम करने वाली आबादी का हिस्सा बढ़ा

1951 में कार्यशील आबादी करीब 39.1 प्रतिशत थी। यानी हर 100 लोगों में लगभग 39 लोग आर्थिक गतिविधियों में शामिल थे। पीएलएफएस 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए रोजगार भागीदारी दर 57.4 प्रतिशत रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 61.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 49.7 प्रतिशत थी।

महिलाओं की कामकाज में भागीदारी

2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 40 प्रतिशत रही। ग्रामीण महिलाओं के लिए यह 45.9 प्रतिशत थी, जबकि उनका रोजगार अनुपात 38.8 प्रतिशत रहा। शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर 25.5 प्रतिशत रही।

स्वास्थ्य मोर्चे पर भारत की स्थिति
स्वास्थ्य मोर्चे पर भारत की स्थिति - फोटो : Amar Ujala

औसत उम्र लगभग दोगुनी हुई

1941-51 में जन्म के समय भारत में जीवन प्रत्याशा 32.1 वर्ष थी। पुरुषों के लिए यह 32.4 वर्ष और महिलाओं के लिए 31.7 वर्ष थी। 2020-24 में जीवन प्रत्याशा बढ़कर 70.8 वर्ष हो गई। पुरुषों में यह 68.7 वर्ष और महिलाओं में 72.8 वर्ष रही।

शिशु मृत्यु दर में भारी कमी

1951-61 में भारत की शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 146 थी। एसआरएस बुलेटिन 2024 के अनुसार, 2024 में यह घटकर 25 प्रति 1,000 जीवित जन्म रह गई। यानी शुरुआती दशक की तुलना में एक वर्ष की उम्र से पहले होने वाली शिशु मौतों की दर में बड़ी गिरावट आई।

मृत्यु दर भी घटी

1950 में भारत की मृत्यु दर प्रति 1,000 आबादी पर 16 थी। एसआरएस सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के अनुसार, 2024 में सकल मृत्यु दर 6.4 प्रति 1,000 आबादी रही।

बिजली उत्पादन और खपत दोनों में दिखे बड़े बदलाव

1950-51 में भारत का कुल बिजली उत्पादन 6.6 अरब किलोवॉट-घंटे था। 1950 में बिजली की कुल खपत 5,610 गीगावॉट-घंटे यानी 561 करोड़ यूनिट थी। 2025-26 में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार कुल बिजली उत्पादन करीब 1,764 अरब यूनिट रहा। इसी अवधि में कुल ऊर्जा आपूर्ति करीब 1,738 अरब यूनिट रही।

शहरों में रहने वाले भारतीय बढ़े

1951 में भारत की कुल आबादी का करीब 17.3 प्रतिशत हिस्सा शहरी क्षेत्रों में रहता था। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2025 में शहरी आबादी की हिस्सेदारी बढ़कर 35.7 प्रतिशत हो गई। यानी आजादी के बाद भारत में शहरों में रहने वाली आबादी का हिस्सा लगातार बढ़ा है।

कितना डिजिटल हुए हम?
कितना डिजिटल हुए हम? - फोटो : Amar Ujala

मोबाइल से इंटरनेट तक बदली कनेक्टिविटी

आजादी के शुरुआती भारत में संचार के साधन बेहद सीमित थे। अब मोबाइल और इंटरनेट रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ट्राई के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार देश में 114.19 करोड़ वायरलेस मोबाइल कनेक्शन थे। इसी समय भारत में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 109.28 करोड़ थी।

दुनिया में भारत की बड़ी उपलब्धियां

1. चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग
2023 में चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना। इसके साथ भारत ने चंद्र सतह पर रोवर चलाने की क्षमता भी प्रदर्शित की।

2. चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया
2008 में चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र मिशन बना। इस मिशन ने चंद्रमा की सतह पर हाइड्रॉक्सिल और पानी के अणुओं की मौजूदगी के प्रमाण हासिल किए। यह भारत की शुरुआती बड़ी अंतरिक्ष उपलब्धियों में शामिल है।

3. मंगल तक पहुंचने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बना
भारत के मंगलयान ने 2014 में मंगल की कक्षा में प्रवेश किया। इस मिशन के साथ भारत मंगल की कक्षा तक पहुंचने वाला दुनिया का चौथा अंतरिक्ष कार्यक्रम बना। खास बात यह रही कि भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

स्पेस क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां
स्पेस क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां - फोटो : Amar Ujala

4. अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक हासिल की
स्पेस डॉकिंग के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। स्पैडेक्स मिशन के जरिए भारत अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग प्रदर्शित करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।

5. सूर्य के अध्ययन के लिए अपना मिशन
भारत ने 2023 में आदित्य-एल1 लॉन्च किया, जो भारत का पहला समर्पित सौर वेधशाला मिशन है। यह सूर्य का अध्ययन करने के लिए भेजा गया भारतीय मिशन है।

6. परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा में एक नए चरण में प्रवेश
अप्रैल 2026 में भारत के स्वदेशी 500 मेगावॉट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली क्रिटिकलिटी हासिल की। सरकार के अनुसार इसके साथ भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया। पूरी तरह चालू होने पर भारत रूस के बाद व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन सकता है। वहीं आईआरईएनए के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है।

7. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक पहचान
संयुक्त राष्ट्र की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने डिजिटल पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी रिपोर्ट में भारत ने बताया कि पिछले एक दशक में 24 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।

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