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भारत में बढ़ रहा वायु प्रदूषण, लेकिन चीन ने कैसे लगाई इस पर लगाम, पढ़ें

Sun, 25 Oct 2020 12:56 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Sun, 25 Oct 2020 12:56 PM IST
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How China managed to consistently reduce PM 2.5 and air pollution concentrations in recent years
धुंध - फोटो : अमर उजाला

चीन को एक वक्त में वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में गिना जाता था। हालांकि, वर्तमान में दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति पीएम 2.5 एक्सपोजर वाले दस देशों की सूची में चीन शामिल नहीं हुआ है। वहीं, भारत इस सूची में शीर्ष पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस और महत्वाकांक्षी कदमों को उठाने की आवश्यकता है। 

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इस सप्ताह के शुरू में जारी 'स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020' की रिपोर्ट बताती है कि प्रदूषण के मामले में चीन अब शीर्ष 30 देशों में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में 2019 में पीएम 2.5 के चलते 14 लाख मृत्यु दर्ज हुई। वहीं, भारत में इस दौरान 9,80,000 लोगों की मौत हुई। 
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रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में पीएम 2.5 प्रदूषण से दुनियाभर में हुई मौतों का 58 फीसदी भारत और चीन में रिपोर्ट किया गया। लेकिन पिछले 5 से 7 वर्षों में चीन की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसे अब सैटेलाइट चित्रों द्वारा भी देखा जा सकता है। चीन में औसत वार्षिक पीएम 2.5 की सांद्रता 2019 में 45 से 75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक थी जबकि भारत में यह 75 से अधिक 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी।

ऐसे में सवाल उठता है कि चीन ने ऐसा क्या किया कि जिससे उसके यहां वायु प्रदूषण में कमी आई। आइए उस पर एक नजर डाली जाए:-

  • चीन ने वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण पर अपनी राष्ट्रीय कार्य योजना को जारी किया। 
  • 2014 में, प्रीमियर ली केकियांग ने नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की चीन की वार्षिक बैठक के उद्घाटन पर प्रदूषण के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 
  • 2013 से 2017 तक देशभर में 200 से अधिक मॉनिटरों के दैनिक डाटा का उपयोग करते हुए पता चला कि सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। इन इलाकों में 21 से 42 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई। 
  • प्रदूषण में ये कटौती जारी रहती है, तो औसत चीनी नागरिक की जीवन प्रत्याशा में 2.4 साल की वृद्धि हो जाएगी। 
  • चीन ने योजना में लगभग 270 बिलियन डॉलर का निवेश क्रमशः घनी आबादी वाले बीजिंग-तियानजिन-हेबेई क्षेत्र, पर्ल और यांग्त्जी नदी डेल्टा क्षेत्रों में किया।
  • बीजिंग ने प्रदूषण से लड़ने के लिए 120 बिलियन डॉलर का फंड अलग से निकाला। इस फंड के जरिए पीएम 2.5 के स्तर को 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक करने का लक्ष्य रखा गया। 
  • योजना ने कोयले पर निर्भरता कम करने, वाहन उत्सर्जन को नियंत्रित करने, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और उत्सर्जन मानकों के प्रवर्तन को बढ़ाकर इन लक्ष्यों को पूरा करने का संकल्प लिया।

 

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