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ABG Shipyard Case: पानी के जहाज बनाने वाली कंपनी ने दो दर्जन से ज्यादा बैंकों को कैसे लगाया गया 22842 करोड़ का चूना? 10 बिंदुओं में समझें

Fri, 18 Feb 2022 04:37 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 18 Feb 2022 04:37 PM IST
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सार
पानी के जहाज बनाने वाली कंपनी एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को चूना लगाकर, उसने 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। यह घोटला देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है।
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How ABG Shipyard defrauded more than two dozen banks for 22842 crores
एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड ने किया सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एबीजी शिपयार्ड घोटाले ने एक बार फिर से देश की सरकार और बैंकों को चौंका दिया है। करीब 23 हजार करोड़ का यह घोटाला  देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। पानी के जहाज बनाने वाली कंपनी एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को चूना लगाकर, उसने 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। यह घोटाला विजय माल्या के 9 हजार करोड़ और नीरव मोदी 14 हजार करोड़ से भी काफी ज्यादा है। 





1. कंपनी का क्या है कारोबार?
एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड की शुरुआत साल 1985 में हुई थी। गुजरात के दाहेज और सूरत में एबीजी समूह की यह शिपयार्ड कंपनी पानी के जहाज बनाने और उनकी मरम्मत का काम करती है। अब तक यह कंपनी 165 जहाज बना चुकी है। इस कंपनी ने 1991 तक तगड़ा मुनाफा कमाते हुए देश-विदेश से बड़े ऑर्डर हासिल किए। 

2. कैसे लिखी गई घोटाले की पटकथा 
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में कंपनी को 55 करोड़ डॉलर से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ और इसके बाद एबीजी शिपयार्ड की हालत पतली होती गई। अपनी वित्तीय हालत का हवाला देते हुए कंपनी ने बैंकों से कर्ज लिया और इस सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया। 

3. किन बैंकों से लिया कितना कर्ज?
स्टेट बैंक की शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने बैंक से 2,925 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक से 7,089 करोड़ , आईडीबीआई बैंक से 3,634 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा से 1,614 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक से 1,244 करोड़ , इंडियन ओवरसीज बैंक से 1,228 करोड़ का कर्ज लिया। इस तरह से कंपनी ने कुल 28 बैंकों से कर्ज लिया।  

4. सही मदों में नहीं हुआ पैसों का इस्तेमाल 
एसबीआई ने अपनी शिकायत में बताया कि, इन पैसों का इस्तेमाल उन मदों में नहीं हुआ जिनके लिए बैंक ने इन्हें जारी किया था बल्कि दूसरे मदों में इसे लगाया गया। 

5. 8 नवंबर 2019 को एसबीआई ने की पहली शिकायत 
एसबीआई ने इस मामले में पहली शिकायत 8 नवंबर 2019 को की थी। डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच-पड़ताल करने के बाद, सीबीआई ने 7 फरवरी, 2022 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की। एसबीआई ने यह भी बताया कि आखिर क्यों बैंकों के संघ की तरफ से उसने की मामले में केस दर्ज करवाया। दरअसल, आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंक कंसोर्शियम में पहले और दूसरे अग्रणी ऋणदाता थे। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एसबीआई सबसे बड़ा ऋणदाता था। इसलिए यह तय हुआ कि सीबीआई के पास शिकायत दर्ज एसबीआई कराएगा। 

6. 2013 में एनपीए हो गया था लोन 
एसबीआई ने बताया है कि उसे 2013 में ही पता चल गया था कि कंपनी का लोन एनपीए हो गया है। इसके बाद एसबीआई की ओर से लोन रिकवरी के लिए कई कोशिश की गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली। 

7. सीबीआई ने की थी छापेमारी
सात फरवरी को मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने 12 फरवरी को 13 स्थानों पर छापेमारी की, जिसके बाद देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया। 

8. सीबीआई ने जारी किया लुक आउट नोटिस
सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड कंपनी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल और आठ अन्य लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। केंद्रीय एजेंसी ने ऋषि कमलेश अग्रवाल के अलावा एबीजी शिपयार्ड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों- अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मामला दर्ज किया। 

9. यूपीए काल का है घोटाला 
स्टेट बैंक के अनुसार, यह घोटाला यूपीए सरकार के समय का है। दरअसल, जब 2013 में एबीजी शिपयार्ड के लोन को एनपीए घोषित किया गया था, तब यूपीए सरकार थी।  साल 2005 से साल 2012 के बीच यह घोटाला हुआ।  साल 2017 में एनसीएलएटी (NCLAT) में मामला गया था। 

10. पैसों का यहां हुआ इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों पर आरोप है कि बैंक फ्रॉड के जरिए प्राप्त किए गए पैसे को विदेश में भेजकर अरबों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी गईं। 18 जनवरी 2019 को अर्नस्ट एंड यंग एलपी द्वारा दाखिल अप्रैल 2012 से जुलाई 2017 तक की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की जांच में सामने आया है कि कंपनी ने गैरकानूनी गतिविधियों के जरिए बैंक से कर्ज में हेरफेर किया और रकम ठिकाने लगा दी। बैंकों का ये भारी-भरकम लोन अमाउंट जुलाई 2016 में एनपीए घोषित हो गया था।

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