कोरोना की तीसरी लहर में आधा हुआ होटल कारोबार: अब तक 24 लाख लोगों ने गंवाई नौकरियां
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया से जुड़े लोगों ने अमर उजाला से कहा कि सरकार के निर्देशों की सीधी मार उनके कारोबार पर पड़ रही है। इस उद्योग को करीब तीन साल से लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। हम सभी नियमों का पालन करते हैं, लेकिन फिर भी हमें ही मार झेलनी पड़ रही है...
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कोरोना की तीसरी लहर के बीच देशभर के रेस्तरां मालिकों को आगे की राह मुश्किल भरी नजर आ रही है। कोविड-19 की वजह से लगाए गए नए प्रतिबंधों ने एक बार फिर उनके व्यवसाय को पटरी से उतार दिया है। ज्यादातर रेस्तरां मालिकों ने इस अनिश्चितता के कारण अपनी विस्तार योजनाएं रोक दी हैं और कारोबार में कमी की भरपाई के लिए राहत की मांग की है। रेस्तरां संचालकों का कहना है कि देश के सभी महानगरों में रेस्तरां पहले ही सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक आधी क्षमता पर चल रहे थे। अगर परिचालन के घंटों और क्षमता की मौजूदा बंदिशें बरकरार रहीं, तो उन्हें अपने कामगारों को हटाने जैसे मुश्किल फैसले लेने होंगे। जबकि इस महीने की शुरुआत से ही कारोबार सामान्य से 40 फीसदी कम हो गया है।
25 फीसदी कारोबारियों ने बंद किए अपने व्यवसाय
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया से जुड़े लोगों ने अमर उजाला से कहा कि सरकार के निर्देशों की सीधी मार उनके कारोबार पर पड़ रही है। इस उद्योग को करीब तीन साल से लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। हम सभी नियमों का पालन करते हैं, लेकिन फिर भी हमें ही मार झेलनी पड़ रही है। पैकिंग और डिलीवरी का अभी कारोबार में मामूली हिस्सा है और यह हमारे कारोबार के लिए उपयुक्त भी नहीं है। पहली लहर के दौरान कई लोगों को अपने कारोबार और आउटलेट्स को बंद करना पड़ा। आउटलेट्स बंद होने उनका कारोबार कम हो गया था, इसलिए उम्मीद है कि अब हम अपने कर्मचारी नहीं गंवाएंगे। कोरोना की दोनों लहर के बाद सभी लोग कम लागत के मॉडल पर परिचालन कर रहे हैं, लेकिन हमारे लिए भी घाटा उठाने की एक सीमा है।
24 लाख कर्मचारियों ने गंवाई नौकरी
एसोसिएशन से जुड़े कुछ सदस्य सरकार के आदेश को मनमानी करार देते हुए कहते है कि हम उन लोगों के आदेशों का पालन कर रहे हैं, जिन्हें ये फैसले लेने का अधिकार है। एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक महामारी की पहली दो लहरों के बाद करीब 25 फीसदी खाद्य कारोबार के उद्यमियों ने अपना कारोबार पूरी तरह बंद कर दिया। 24 लाख लोगों का रोजगार छिन गया है। भारत के खाद्य बाजार का आकार घटकर वित्त वर्ष 2021 में 2,00,762 करोड़ रुपये पर आ गया, जो वित्त वर्ष 2020 में 4,23,624 करोड़ रुपये रहा था। रेस्टोरेंट एसोसिएशन के मुताबिक अगर तत्काल राहत के उपाय नहीं किए गए, तो यह सेक्टर स्थायी रूप से कमजोर हो जाएगा।
60 फीसदी घटा कारोबार
इन प्रतिबंधों से अन्य शहरों के रेस्तरां मालिक भी खफा हैं। फेडरेशन ऑफ होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) का कहना है कि सरकार और मीडिया ने मनोरोग पैदा कर दिया है। लोगों को सतर्कता और चिंता नहीं करने की सलाह के बजाय इसकी एक लंबी फेहरिस्त तैयार की गई है कि क्या न करें। इसके नतीजतन लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं। सभी रेस्तरां सुनसान हैं। इनमें लोगों का आना महज 15 फीसदी रह गया है, जो पहले 80 फीसदी तक था। दूसरी लहर के बाद कारोबार सुधरने लगा था। असल में यह त्योहारी सीजन की बदौलत पहले से बेहतर हो गया था। लेकिन अब कारोबार 60 फीसदी तक घट गया है। जबकि इस महीने की शुरुआत से कारोबार सामान्य से 40 फीसदी कम हो गया है।