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गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला: पूर्वोत्तर के कई संगठनों पर UAPA के तहत कार्रवाई, पांच साल के लिए कड़े प्रतिबंध

Mon, 13 Nov 2023 04:16 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 13 Nov 2023 04:16 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत की कई संस्थाओं पर UAPA कानून के तहत बैन लगाया है। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के बाद संगठनों पर पांच साल का बैन लागू होगा।

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Home Ministry UAPA action Meitei Extremist Organisations unlawful associations for five years
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल) - फोटो : amar ujala

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में जनजातीय संघर्ष के बीच चर्चा में आए मैतेई समुदाय से जुड़े होने का दावा करने वाले तीन संगठनों को गैरकानूनी करार दिया है। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में बताया गया कि मैतेई चरमपंथी संगठनों-पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) अगले पांच साल के लिए प्रतिबंधित संगठन होंगे।
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अधिसूचना जारी होने के दिन से पांच साल का बैन
गैरकानूनी संघ के रूप में वर्गीकरण के बाद इन संगठनों पर कई प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। पूर्वोत्तर भारत में अशांति फैलाने के आरोपी संगठनों पर नकेल कसते हुए गृह मंत्रालय ने कई और संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। सोमवार को गृह मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार, पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) को भी गैरकानूनी संगठन माना जाएगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सभी संगठनों को 13 नवंबर, 2023 से पांच साल के लिए बैन किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित राज्यों में अधिसूचना भेजी जाएगी।
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पांच साल का बैन लगेगा
गृह मंत्रालय ने कहा, पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) की सशस्त्र शाखा- लाल सेना, कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) और इसके सशस्त्र विंग- लाल सेना, कांगलेई याओल कनबा लुप (केवाईकेएल), समन्वय समिति (कोरकॉम), और एलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलेइपाक (एएसयूके) सहित सभी उनके गुटों, विंगों और अग्रणी संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। गृह मंत्राल. ने बताया कि गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम के लिए बनाए गए कानून- UAPA अधिनियम, 1967 के तहत उक्त सभी इकाइयों को पांच साल की अवधि के लिए गैरकानूनी संघ माना जाएगा।

पूर्वोत्तर के हालात बेहद संवेदनशील
बता दें कि जनजातीय संगठनों के टकराव के कारण बीते दिनों मणिपुर लगातार सुर्खियों में रहा था। चुराचांदपुर समेत पहाड़ी इलाकों से हिंसा की विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आई थीं। मैतेई और कुकी कम्युनिटी के लोगों के बीच हिंसक संघर्ष हुए जिसमें कई लोगों की मौत भी हुई। हालात इतने खराब और संवेदनशील हो गए थे जिसमें खुद गृह मंत्री अमित शाह को मोर्चा संभालना पड़ा था। आंतरिक सुरक्षा मामलों की समीक्षा करने के बाद शाह ने मणिपुर की स्थिति पर पैनी नजर होने का दावा किया था। हालांकि, विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का इस्तीफा मांगा था। समय बीतने के साथ हालात सामान्य हुए। पुलिस पर विफलता के आरोप के बीच सरकार ने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का तबादला कर दिया था। राजीव सिंह को डीजीपी बनाया गया है।
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