गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर के अलगाववादियों को दी सीधी चेतावनी, पूरे नहीं होंगे मंसूबे
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह माह बढ़ाने के संवैधानिक संकल्प के पारित होने से पहले लोकसभा में बोलते हुए अलगाववादियों को सीधी चेतावनी दे डाली। केवल अलगाववादी ही नहीं, बल्कि शाह ने इशारों इशारों में जम्मू-कश्मीर के तीन राजनीतिक दलों को भी खरी खरी सुना दी। उन्होंने कहा, वे लोग जिनके मन में अलगाववादियों के प्रति हमदर्दी है, कश्मीर में आग लगाने वालों के लिए सहानुभूति है और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मंशा पाले हैं, उनके मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।
अमित शाह ने जब ये बात कही तो कांग्रेसी नेताओं की ओर से कहा गया कि वे गुस्से के चलते तेज आवाज में बोल रहे हैं। इस बात पर शाह ने कहा, आप आवाज पर क्यों जाते हैं, कांटेंट पर जाओ न। वे यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने कहा, मेरी आवाज भारी है, गुस्सा नहीं है। इस पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।
कांग्रेस सांसद को दे डाली इतिहास पढ़ने की सलाह
जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे से गुरुवार को लौटे शाह का आत्मविश्वास सदन में साफ झलक रहा था। जिस भी सांसद ने कश्मीर से संबंधित जो कुछ पूछा, शाह ने अपने एक खास अंदाज में उसका जवाब दिया। गृहमंत्री ने कांग्रेस के एक सांसद द्वारा कश्मीर में राष्ट्रपति शासन और चुनाव कराने बाबत लगाए गए आक्षेप का करारा जवाब दिया। उन्होंने सांसद को इतिहास में जाकर कुछ समझने की सलाह दे डाली। साथ ही कहा, ये भी देख लेना कि अभी तक जम्मू-कश्मीर में कितनी बार राष्ट्रपति शासन लगा है और वह किस सरकार के दौरान लगा है।
जब कुछ सदस्य इसका विरोध करने लगे तो शाह ने कहा, चिल्लाने में कुछ नहीं रखा है। चुनाव कब होगा, यह सरकार तय नहीं करती है। इसके लिए चुनाव आयोग है। उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर से कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, चुनाव आयोग का काम पहले सरकार करती थी, लेकिन अब चुनाव आयोग खुद अपना काम करता है। शाह ने यह भी साफ कर दिया कि आप इस मुद्दे पर यदि इतिहास में जाना चाहते हैं तो जाओ, लेकिन पछताना पड़ेगा। पहले जम्मू-कश्मीर में तीन परिवारों के पास सारे अधिकार होते थे। अब केंद्र की भाजपा सरकार ने वह शक्ति उन परिवारों के हाथ से निकालकर जनता को दे दी है।
'आतंकी संगठनों पर भाजपा ने लगाए प्रतिबंध'
गृहमंत्री ने आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने वालों के लिए भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। वे बोले, जिनके मन में अलगाववादियों के लिए हमदर्दी है, जम्मू-कश्मीर में आग लगाने का प्रयास करते हैं या इस राज्य को भारत से अलग करने के मंसूबे पाले हैं, केंद्र की भाजपा सरकार उनके ऐसे मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी। गृहमंत्री का इशारा, जम्मू-कश्मीर पर शासन करने वाली कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस की ओर था।
पिछले दिनों जांच एजेंसियों ने जब अलगावादियों पर शिकंजा कसा था तो कई खुलासे हुए। ये लोग कथित तौर पर पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को आर्थिक और दूसरी तरह की मदद करते पाए गए हैं। ऐसे कई लोगों की प्रॉपर्टी भी जब्त की गई है। पूर्ववर्ती सरकारों के शासन में 919 लोगों को अनावश्यक तौर पर सुरक्षा प्रदान की गई थी। मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसे लोगों की सुरक्षा वापस ली गई है। जमात-ए-इस्लामी तथा जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।