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Amit Shah: गृहमंत्री ने कहा- 1984 के दंगे नहीं भूल सकते, शाह बोले- 300 मामले फिर से खोले, दोषियों को भेजा जेल

Sat, 14 Oct 2023 05:25 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 14 Oct 2023 05:25 AM IST
सार

गृह मंत्री शाह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आयोजित अभिनंदन समारोह में  शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार यह तय करेगी कि जो भी मामले चल रहे हैं, उनमें पीड़ितों को इंसाफ मिले।

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Home Minister Amit Shah says 1984 riots cannot be forgotten 300 cases reopened culprits sent to jail
अमित शाह - फोटो : amar ujala

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कोई भी सभ्य व्यक्ति 1984 के दंगे नहीं भूल सकता। राजनीतिक इशारे पर नृशंस हत्याएं की गईं लेकिन, किसी दोषी को सजा नहीं दी गई। 2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद दंगे के 300 मामलों को फिर से खोला गया और दोषियों को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।

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गृह मंत्री शाह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आयोजित अभिनंदन समारोह में  शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार यह तय करेगी कि जो भी मामले चल रहे हैं, उनमें पीड़ितों को इंसाफ मिले। मोदी सरकार ने ही पहली बार 3,328 पीड़ित परिवारों में से प्रत्येक को 5 लाख रुपये देने और जलिया वाला बाग स्मारक को फिर से गौरवान्वित करने का काम किया है।

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मानवता के लिए सिख गुरुओं के बलिदान की बराबरी नहीं
शाह ने कहा, मानवता और देश के लिए सिख गुरुओं के बलिदान की बराबरी कोई नहीं कर सकता। सिख पंथ के अलावा ऐसा कोई दूसरा पंथ नहीं, जिसने 10 पीढ़ियों तक आक्रांताओं के अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए बलिदान दिया हो। औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ कश्मीरी पंडितों की मदद के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 9वें गुरु तेग बहादुर को देश हमेशा याद रखेगा। पीएम मोदी ने गुरु तेग बहादुर की स्मृति में लाल किले पर ठीक उसी जगह उत्सव मनाने का फैसला किया, जहां उनकी शहीदी की घोषणा हुई थी।

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सिख कौम हमेशा सबसे आगे रही
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन, मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई, विभाजन की विभीषिका या आजादी के बाद देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो, सिख कौम हमेशा सबसे आगे रही है। हमारा आजादी के संघर्ष का इतिहास सिख बहादुरों के बलिदान से भरा पड़ा है और देश के आजाद होने के बाद इसकी सुरक्षा के लिए भी सबसे अधिक बलिदान सिख पंथ के अनुयायी ही देते आए हैं।



मातृशक्ति को सशक्त करने की परंपरा भी सिख पंथ ने दी
शाह ने कहा कि मातृ शक्ति को सशक्त करने की परंपरा सिख पंथ में माता खिवी के लंगर की सीख से वर्षों पहले शुरू हुई। इतिहास में भी ये दर्ज है कि सिख पंथ से निकली मातृशक्ति ने न केवल आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया, बल्कि देश को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। सिख पंथ की इसी सीख को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने राज्यों की विधानसभाओं और संसद में मातृशक्ति को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए कानून बनाया है।




 

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