वीर सावरकर पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान का पूरा सच जानिए यहां
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
- वायरल दावा भ्रामक है
- अमर उजाला की पड़ताल के चरण
- यह खबर झूठी है : जानिए कारण
- अमित शाह का वीर सावरकर को लेकर अधूरा बयान गलत दावे के साथ हो रहा है वायरल
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
सोशल मीडिया पर इनदिनों एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि 1857 क्रांति सावरकर के बिना संभव नहीं थी, जबकि असल में उनका जन्म ही 1883 में हुआ था। पोस्ट में बताया जा रहा है कि यह बयान देश के गृह मंत्री अमित शाह का है। हमने इस दावे की पड़ताल की और सच सामने आया, उसके बारे में आपको बता रहे हैं, ताकि आप ऐसी अफवाहों से बच सकें।
दावा: वायरल पोस्ट मे कहा जा रहा है कि, 'गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 1857 क्रांति सावरकर के बिना संभव नहीं थी, जबकि असल में उनका जन्म ही 1883 में हुआ था।'
पड़ताल: यह दावा भ्रामक है क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, सावरकर ने 1857 की क्रांति को "पहले स्वतंत्रता संग्राम" का नाम दिया था। इस वायरल पोस्ट में अमित शाह के भाषण को आधा अधूरा पेश किया गया है, और लोगों को बरगलाने की कोशिश की गई है।
दावाकर्ता: फेसबुक यूजर राशिद भाई परदेसी
नाम: राशिद भाई परदेसी
तारीख: 18 अक्टूबर 2019
डिस्क्रिप्शन: "लगे हाथ यह भी कह देते कि मैंने भी 1857 के जंग में 200 अंग्रेजो को मार भगाया था।"
वायरल पोस्ट में वीर सावरकर की एक तस्वीर है और उसके सामने टेक्स्ट में लिखा है लिखा है, "सच्चाई: सावरकर का जन्म 1883 में हुआ था।” गृह मंत्री या झूठ मंत्री। बिहार प्रदेश कांग्रेस।”
पड़ताल के चरण
सबसे पहले इस तस्वीर को ध्यान से देखा और सटीक "की-वर्ड्स" का चयन किया। जैसे, अमित शाह और वीर सावरकर, अमित शाह सावरकर भाषण, वीर सावरकर विवाद, अमित शाह ऑन 1857 इत्यादि। इसके बाद हमने इन की-वर्ड्स को गूगल पर सर्च किया, हमारे आगे तमाम लिंक्स खुल गए और लिंक्स को देखना शुरू किया।
यहां पर तीन मुख्य तथ्य हमारे हाथ लगे:
दूसरा, भाजपा के यूट्यूब चैनल का वह लिंक जिसमें अमित शाह के वाराणसी रैली का भाषण था जिसमे इस बात का जिक्र किया गया था।
तीसरा, अमर उजाला का वाराणसी रैली से संबंधित लेख।
एएनआई के अपने ट्वीट में लिखा था "वाराणसी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह: अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 की क्रांति हमारे इतिहास का हिस्सा नहीं बन पाती। इस क्रांति को हम अंग्रेजों के चश्मे से ही देख रहे होते। वीर सावरकर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने 1857 की इस क्रांति को विद्रोह नहीं, बल्कि भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया।"
सर्च करने पर 17 अक्टूबर 2019 को प्रकाशित अमर उजाला वेब का एक लेख हमारे हाथ लगा जिसकी शीर्षक था, 'बीएचयू में शाह बोले- वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति इतिहास नहीं बन पाती' इसके अंतर्गत उस भाषण का टुकड़ा मिल गया जिसमे उन्होने कहा था, "इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए स्कंदगुप्त के इतिहास के बिखरे पन्नों को एकत्र कर नए इतिहास का पुर्नलेखन जरूरी है। वीर सावरकर न होते तो सन 57 की पहली क्रांति स्वंतत्रता संग्राम का नाम बच्चे न जान पाते। वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 का संग्राम इतिहास में दर्ज नहीं हो पाता। "
वीर सावरकर ने ही 1857 की क्रांति को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया: श्री अमित शाह
हमने इस वीडियो को फ्रेम दर फ्रेम देखा और जिसमे उन्होंने बोला था, "शायद वीर सावरकर न होते तो सन 1857 की क्रांति भी इतिहास न बनती, उसे भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से ही देखते। वीर सावरकर ने ही सन 1857 की क्रांति को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम देने का काम किया| आज भी वर्ना हमारे बच्चे उसको विप्लव के नाम से जानते।"
यह खबर झूठी है: कारण
- अगर इस तरह का गलत तथ्य देश के गृह मंत्री द्वारा कहा जाता तो इस पर बड़ा विवाद और बहस होती मगर ऐसा कुछ भी सर्च करने पर नहीं मिला।
-
गूगल रिवर्स इमेज सर्च टूल में किसी भी बड़े और प्रमाणिक प्रकाशन और ब्रॉडकास्ट में इस खबर का कोई आधार नहीं मिला।
-
भाजपा के पेज पर भी इस तरह का कोई वीडियो नहीं मिला और जो वीडियो मिला उसको सुनने के बाद कही भी इस तरह का वक्तव्य नहीं मिला।
-
उसके बाद प्रमाणिक मंचों पर इस खबर को खोजना शुरू किया मगर कही पर ये खबर इस दावे के साथ प्रकाशित और प्रसारित होती हुयी नहीं मिली।
-
विपक्षी पार्टी का भी कोई खंडन सामने नहीं आया।
* Fact Check By Google Certified Fact Checker ( Rama Solanki)