लद्दाख घोषित होगा आदिवासी क्षेत्र, प्रमुख मंत्रालयों ने जताई सहमति
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केंद्रीय गृह, विधि और आदिवासी मामलों के मंत्रालय सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग लद्दाख को आदिवासी क्षेत्र घोषित करने पर सहमत हो गए हैं।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस मुद्दे पर मंत्रालयों और आयोग के प्रतिनिधियों के बीच चार सितंबर को आंतरिक चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लद्दाख को आदिवासी क्षेत्र का दर्जा देने के प्रस्ताव पर सभी ने हामी भरी है।
इसे लेकर संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के विभिन्न प्रावधानों में समायोजन पर चर्चा की गई। इस बारे में अंतिम फैसला 11 सितंबर को लिया जाएगा।
गौरतलब है कि लद्दाख को आदिवासी क्षेत्र घोषित करने की मांग पहले भी उठती रही है। संविधान की छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के आदिवासी क्षेत्रों के लिए स्वायत्तशासी जिले और क्षेत्रीय परिषदों के गठन के बाद प्रशासन की बात कही गई है।
जम्मू कश्मीर और लद्दाख का एक ही हाईकोर्ट होगा
पुनर्गठन के बाद भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए एक ही हाईकोर्ट होगा। मौजूदा कानून और सुनवाई भी पहले की तरह ही चलेंगी। हालांकि आगामी 31 अक्टूबर के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में केंद्र के 108 कानून सीधे तौर पर लागू हो जाएंगे।
वहीं, जम्मू कश्मीर के अपने 164 कानून निरस्त हो जाएंगे, जबकि 166 कानून राज्य के जारी रहेंगे। यह जानकारी राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से जम्मू संभाग के जिला सेशन जजों के लिए रविवार को कबूलनामे और सह अपराधी की स्टेटमेंट में ‘एप्रिसिएशन ऑफ एविडेंस’ विषय पर आयोजित रिफ्रेशर कार्यक्रम में दी गई।
इस अवसर पर पूर्व जज जनकराज कोतवाल ने कहा कि ‘एप्रिसिएशन ऑफ एविडेंस’ के मामले में एविडेंस एक्ट की जरूरत है। अकादमी के निदेशक राजीव गुप्ता ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 और कोर्ट में लंबित मामलों पर अपने विचार रखे। ब्यूरो