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जम्मू-कश्मीर में हिंदू-सिखों को अल्पसंख्यक दर्जे पर होगा परीक्षण

Tue, 28 Mar 2017 08:14 AM IST
amarujala.com- presented by: संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com- presented by: संदीप भ्ाट्ट Updated Tue, 28 Mar 2017 08:14 AM IST
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Hindu-Sikhs in Jammu and Kashmir to examine minority status
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से मिल बैठकर इस बात का परीक्षण करने को कहा है कि हिंदू और सिख आदि राज्य में अल्पसंख्यक के दायरे में आते हैं या नहीं। सरकार ने कहा कि दोनों सरकार को बातचीत कर परीक्षण करना चाहिए कि क्या इन समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं?
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के उन बयानों को रिकार्ड पर लिया जिसमें दोनों ने जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यकों की समस्या पर विचार करने के लिए साथ विचार-विमर्श करने का निर्णय लिया है। पीठ ने सरकार को चार हफ्ते में प्रस्ताव पेश करने को कहा है।
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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष कहा कि कानून मंत्रालय बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने से संबंधित पहलू पर परीक्षण कर रही है। उन्होंने बताया कि संभव है कि राज्य में अल्पसंख्यक आयोग का जल्द गठन हो जाए। इस पर पीठ ने कहा कि हम समझ सकते कि यह महत्वपूर्ण मसला है। पीठ ने कहा कि इस बात पर गौर करने की जरूरत है कि अल्पसंख्यक का दर्जा देने का मसला क्यों उठा। जिसके बाद केंद्र और जम्मू-कश्मीर की ओर से पेश वकीलों ने यह भरोसा दिलाया कि वह मिल बैठकर इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
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शीर्ष अदालत अंकुर शर्मा द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि धर्म और भाषा के आधार पर अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी अल्पसंख्यकों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है। 

याचिका में कहा गया है कि तकनीकी पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र के लिए वर्ष 2007-2008 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यकों के लिए 20 हजार छात्रवृत्ति ऑफर किए थे। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में दी जाने वाली कुल 753 छात्रवृत्तियों में से 717 मुस्लिमों को दी गई, जबकि ईसाइयों को दो, सिखों को 22 और बौद्ध धर्म के लोगों को 12 छात्रवृत्तियां दी गईं। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि अब तक न तो जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक आयोग नहीं है और न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम ही बना है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार तरीके से होना चाहिए क्योंकि भले ही किसी समुदाय की जनसंख्या देशभर में अधिक हो लेकिन किसी राज्य में उनकी संख्या कम हो तो उसे अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए।

बहुसंख्यक होते हुए  भी अल्पसंख्यक क्यों

Hindu-Sikhs in Jammu and Kashmir to examine minority status

याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा गया था कि जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों की आबादी करीब 67 फीसदी है, लिहाजा राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं बल्कि बहुसंख्यक है। बावजूद इसके उन्हें अल्पसंख्यकों वाले फायदे मिल रहे हैं, जबकि दूसरे अल्पसंख्यक इन फायदों से महरूम हैं। यह उन लोगों के मूल अधिकारों के हनन है जो सही मायने में इसके हकदार हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह लाभ मुस्लिमों को लंबे समय से मिल रहा है।

जम्मू-कश्मीर में 68.3 फीसदी है मुस्लिम आबादी
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में करीब 68.3 फीसदी मुस्लिम हैं। जबकि हिंदू 28.4 फीसदी, सिख 1.9 फीसदी हैं। वहीं सिर्फ कश्मीर घाटी में 96.4 फीसदी मुस्लिम, 2.45 फीसदी हिंदू और करीब 0.98 फीसदी सिख हैं।

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