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हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल, बीमार ड्राइवर की तरफ से वन अधिकारी ने रखा रोजा
Fri, 31 May 2019 11:13 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 31 May 2019 11:13 AM IST
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संजय एन माली
- फोटो : ANI
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महाराष्ट्र में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली है। बुलढाणा में प्रभागीय वन अधिकारी संजय एन माली ने अपने ड्राइवर जफर की जगह 'रोजा' रखकर एकता का पैगाम दिया है। संजय ने बताया कि उसने अपने ड्राइवर से 6 मई को पूछा था कि क्या तुम रोजा रखोगे? ड्राइवर ने बीमार होने के कारण रोजा रखने से मना कर दिया।
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माली ने आगे बताया कि मैंने ड्राइवर से कहा, मैं तुम्हारी जगह रोजा रखूंगा। छह मई को मैंने रोजा रखा। सुबह चार बजे उठकर सहरी में कुछ खाया और शाम सात बजे इफ्तार (रोजा खोलना) किया। जो जानकारी रमजान के बारे में मुझे मिली मैंने उसे अपनाते हुए रोजा रखा।
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माली ने आगे कहा कि हर इंसान के अंदर सांप्रदायिक सौहार्द्र होना चाहिए। मैं हर धर्म में विश्वास रखता हूं। हर धर्म हमें अच्छा सिखाता है। हमें पहले इंसानियत को मानना चाहिए बाद में धर्म को। रोजा रखने के बाद मैं काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। मालूम हो कि एक महीने के रोजे के बाद जून के पहले हफ्ते में ईद मनाई जाएगी।
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बता दें कि इस्लाम धर्म में रमजान माह का खास महत्व है। मान्यता है कि इस महीने में आसमान से पवित्र पुस्तक कुरान शरीफ को धरती पर लाया गया था। इसे बरकतों और रहमतों का पाक माह भी कहा जाता है। रमजान का महीना सब्र और सुकून का है। कुरान शरीफ में कई जगह रोजा रखने को जरूरी बताया गया है।