{"_id":"6874cf2a7627957ab106eafe","slug":"hindu-marriage-in-danger-due-to-disputes-over-small-matters-bombay-hc-worried-disintegrating-relationship-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bombay High Court: 'छोटी-छोटी बात पर विवाद से खतरे में हिंदू विवाह', बिखरते रिश्तों पर बॉम्बे हाईकोर्ट चिंतित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bombay High Court: 'छोटी-छोटी बात पर विवाद से खतरे में हिंदू विवाह', बिखरते रिश्तों पर बॉम्बे हाईकोर्ट चिंतित
Mon, 14 Jul 2025 03:05 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 14 Jul 2025 03:05 PM IST
सार
दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले को दंपती के अनुरोध पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहते हैं और शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं, तो न्यायालय को उनको प्रोत्साहित करना चाहिए।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आधुनिकता की चकाचौंध में बिखर रहे रिश्तों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने एक युवक और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न के मामले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि छोटी-छोटी बात पर हो रहे विवादों के चलते पवित्र माना जाने वाला हिंदू विवाह खतरे में पड़ रहा है। न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति एम.एम. नेर्लिकर की नागपुर पीठ ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अगर पुनर्मिलन संभव नहीं है, तो इसे तत्काल समाप्त कर दिया जाना चाहिए। ताकि दोनों पक्षों का जीवन बर्बाद न हो।
दिसंबर 2023 में एक युवक और उसके परिजनों के खिलाफ अलग रह रही उसकी पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। युवक और उसके परिजनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके दहेज उत्पीड़न के मामले को रद्द करने की मांग की थी। दंपती ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपना विवाद सुलझा लिया है। उन्हें आपसी सहमति से तलाक दे दिया गया है। महिला ने पीठ को बताया कि यदि मामला रद्द कर दिया जाता है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वह अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती है।
ये भी पढ़ें: केरल सरकार ने किया राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका को वापस लेने का अनुरोध, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का विरोध
विज्ञापन
इस पर पीठ ने मामले को खारिज किया। पीठ ने कहा कि यूं तो भारतीय दंड संहिता और दहेज निषेध अधिनियम के तहत दहेज उत्पीड़न और अप्राकृतिक यौन संबंध से संबंधित प्रावधानों में समझौता नहीं किया जा सकता है। फिर भी न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने के लिए अदालतें कार्यवाही को रद्द कर सकती हैं। अदालत ने कहा कि पति की ओर से कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। इसे देखते हुए वैवाहिक विवादों को एक अलग नजरिये से देखना जरूरी हो है।
कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहते हैं और शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं, तो न्यायालय को उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। विभिन्न कारणों से आजकल वैवाहिक कलह समाज में बड़ी समस्या बन गई है। दंपती के बीच छोटी-छोटी समस्याएं उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती हैं। हिंदुओं में पवित्र मानी जाने वाली शादी खतरे में पड़ जाती है।
ये भी पढ़ें: 'निमिषा की फांसी के आदेश को निलंबित करने के लिए बातचीत चल रही', सरकार ने कोर्ट को बताया
कोर्ट ने कहा कि विवाह महज एक सामाजिक अनुबंध नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक मिलन है जो दो आत्माओं को एक साथ बांधता है। वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाने के इरादे से कई अधिनियम बनाए गए, लेकिन लोग अक्सर उनका दुरुपयोग करते हैं। इससे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, अंतहीन संघर्ष, वित्तीय नुकसान और परिवार के सदस्यों और बच्चों को अपूरणीय क्षति होती है।
विज्ञापन
दिसंबर 2023 में एक युवक और उसके परिजनों के खिलाफ अलग रह रही उसकी पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। युवक और उसके परिजनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके दहेज उत्पीड़न के मामले को रद्द करने की मांग की थी। दंपती ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपना विवाद सुलझा लिया है। उन्हें आपसी सहमति से तलाक दे दिया गया है। महिला ने पीठ को बताया कि यदि मामला रद्द कर दिया जाता है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वह अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहती है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: केरल सरकार ने किया राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका को वापस लेने का अनुरोध, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का विरोध
विज्ञापन
इस पर पीठ ने मामले को खारिज किया। पीठ ने कहा कि यूं तो भारतीय दंड संहिता और दहेज निषेध अधिनियम के तहत दहेज उत्पीड़न और अप्राकृतिक यौन संबंध से संबंधित प्रावधानों में समझौता नहीं किया जा सकता है। फिर भी न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने के लिए अदालतें कार्यवाही को रद्द कर सकती हैं। अदालत ने कहा कि पति की ओर से कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। इसे देखते हुए वैवाहिक विवादों को एक अलग नजरिये से देखना जरूरी हो है।
कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहते हैं और शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं, तो न्यायालय को उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। विभिन्न कारणों से आजकल वैवाहिक कलह समाज में बड़ी समस्या बन गई है। दंपती के बीच छोटी-छोटी समस्याएं उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती हैं। हिंदुओं में पवित्र मानी जाने वाली शादी खतरे में पड़ जाती है।
ये भी पढ़ें: 'निमिषा की फांसी के आदेश को निलंबित करने के लिए बातचीत चल रही', सरकार ने कोर्ट को बताया
कोर्ट ने कहा कि विवाह महज एक सामाजिक अनुबंध नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक मिलन है जो दो आत्माओं को एक साथ बांधता है। वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाने के इरादे से कई अधिनियम बनाए गए, लेकिन लोग अक्सर उनका दुरुपयोग करते हैं। इससे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, अंतहीन संघर्ष, वित्तीय नुकसान और परिवार के सदस्यों और बच्चों को अपूरणीय क्षति होती है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन