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Hindenburg: शेयर बाजार ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को दिखाया ठेंगा, बड़े भूकंप से कैसे बचा स्टॉक मार्केट?

Mon, 12 Aug 2024 02:08 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 12 Aug 2024 02:08 PM IST
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सार
शेयर बाजार ने हिंडनबर्ग पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मामला भले ही ठंडा कर दिया हो, लेकिन राजनीतिक हलके में रिपोर्ट के कारण भारी तूफान आता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक सुनियोजित षडयंत्र बताया है। वहीं, विपक्ष आज भी इस मामले पर जेपीसी गठित कर इस मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है। 
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Hindenburg Report Share Market unaffected trades in high indices know how Stocks Survived news and updates
शेयर बाजार पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का खास असर नहीं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाजार ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट से शुरुआती दौर में झटका खाने के बाद उसे ठेंगा दिखा दिया है। शुरुआती दौर में लग रहा था कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के कारण बाजार में एक बार फिर बड़ा नुकसान हो सकता है, अडानी ग्रुप सहित कुछ बड़ी कंपनियों को भी रिपोर्ट के कारण बड़ा नुकसान हो सकता है। लेकिन शुरुआती दौर में कुछ नुकसान होने के बाद बाजार तेजी से संभला और अब यह बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस समय बीएसई 80 हजार के अंक के आसपास ट्रेड कर रहा है। इस बीच यह प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट का बाजार पर कोई असर क्यों नहीं हुआ जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी? 


शेयर बाजार ने हिंडनबर्ग पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मामला भले ही ठंडा कर दिया हो, लेकिन राजनीतिक हलके में रिपोर्ट के कारण भारी तूफान आता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट को देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक सुनियोजित षडयंत्र बताया है। वहीं, विपक्ष आज भी इस मामले पर जेपीसी गठित कर इस मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है। 


काम आई सेबी की रणनीति 
दरअसल, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट शनिवार को ही सामने आ गई थी। रविवार को इसकी चर्चा के बाद सोमवार को बाजार खुलने के बाद बाजार में बड़ी हलचल होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही थी। सोमवार को भी शुरुआती संकेत इसी तरफ आगे बढ़ते दिखाई भी दे रहे थे, लेकिन जल्द ही बाजार संभल गया और एक बार फिर हरे निशान में पहुंच गया। माना जा रहा है कि इसके पीछे सेबी सहित कई एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण रही जिसके कारण निवेशकों की गाढ़ी कमाई लुटने से बच गई।   



हिंडनबर्ग की बजाय सेबी की बात पर ज्यादा भरोसा
दरअसल इस बार हिंडनबर्ग ने अडानी समूह की बजाय सेबी को निशाना बनाया था। सेबी अधिकारियों को मालूम था कि यदि इस बार शेयर बाजार में भारी गिरावट होती है, तो इसका सीधा असर संस्था की साख पर पड़ सकता है। संभवतः यही कारण है कि सेबी ने रविवार शाम को ही एक विस्तृत जवाब देकर हिंडनबर्ग रिपोर्ट की पूरी हवा निकाल दी। उसने बताया कि उसकी आंतरिक समिति के पास इस तरह के मामलों से बचने के लिए पूरा सिस्टम मौजूद है। सेबी ने यह भी बताया कि माधबी पुरी बुच ने संबंधित मामलों की जांच से पहले ही खुद को अलग कर लिया था। बाजार की स्थिति बताती है कि निवेशकों ने हिंडनबर्ग की बजाय सेबी की बात पर ज्यादा भरोसा किया है।

सेबी ने निवेशकों से भी बताया कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। वे सोच समझकर ही अपने शेयरों की खरीदी-बिकवाली करें। साथ ही संस्था ने बताया कि अडानी समूह से जुड़े सभी 24 मामलों की जांच की गई है। 23 मामले की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि अंतिम मामले में रिपोर्ट जल्द ही आने वाली है। 

सेबी के साथ-साथ अडानी ग्रुप ने भी इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया था। माधबी पुरी बुच ने भी अपने पति के साथ सामने आकर इस मामले पर अपना पूरा पक्ष देश के सामने रख दिया था। आर्थिक मामलों के जानकार मान रहे हैं कि संभवतया यही कारण है कि लोगों को हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर ज्यादा भरोसा नहीं हुआ और बाजार बच गया। 

'लोगों का भरोसा अपनी संस्थाओं पर'
आर्थिक मामलों के जानकार शुभम पाहूजा ने अमर उजाला को बताया कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट की पहली किस्त में ही उसकी मंशा पर सवाल खड़े हो गए थे। उसने किसी ऐसी नई चीज की जानकारी नहीं दी थी जो पहले से पब्लिक डोमेन में न रही हो। इसके बाद भी जब रिपोर्ट जारी की गई तब अडानी ग्रुप को पहली बार बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन जल्द ही यह देखा गया कि अडानी समूह ने अपना खोया जन विश्वास और संपत्ति दोबारा हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि संभवतः यही कारण है कि लोगों ने अब हिंडनबर्ग रिपोर्ट को उतना महत्त्व नहीं दिया। 

भाजपा ने कांग्रेस की साजिश बताया
भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट जारी कर देश की अर्थव्यवस्था को झटका देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में इस तरह की रिपोर्ट नहीं जारी की जाती थी, जबकि उस समय अनेक घोटाले किए जा रहे थे, लेकिन अब जब कि विदेशी निवेशकों का भरोसा देश पर बना हुआ है और भारी निवेश  से देश की अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर करती दिखाई दे रही है, इस तरह की रिपोर्ट जारी कर निवेशकों का भरोसा डिगाने की कोशिश की जा रही है। 

हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके बाद भी विदेशी निवेशकों सहित घरेलू निवेशकों ने भी निवेश करना जारी रखा है, जो दिखाता है कि उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्यादा भरोसा है और हिंडनबर्ग जैसी रिपोर्ट पर नहीं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया है। 

जेपीसी की मांग कर रही कांग्रेस 
10 अगस्त को हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के साथ ही कांग्रेस ने इस मसले पर हमलावर रुख अपना लिया था। पार्टी का आरोप रहा है कि सरकार कुछ उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है। उसने हिंडनबर्ग मामले की पूरी जांच के लिए जेपीसी गठित किए जाने की मांग की है। विपक्ष ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि संसद की कार्यवाही को समय से पहले स्थगित क्यों कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार को यह पता चल गया था कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने वाली है और इस मुद्दे पर उसे सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब देना पड़ सकता है। यही कारण है कि उसने समय से पहले सत्रावसान कर मामले से बचने का रास्ता निकाल लिया। 
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