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हिमंत बिस्वा सरमा बोले: अगर नहीं लागू होगी समान नागरिक संहिता तो, जारी रहेगी बहुविवाह प्रणाली

Sun, 01 May 2022 08:24 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 01 May 2022 08:24 PM IST
सार

गुवाहाटी में सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती है, तो बहुविवाह प्रणाली जारी रहेगी। एक पुरुष एक महिला के मौलिक अधिकारों को कम करते हुए 3-4 बार शादी करेगा।

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Himanta Biswa Sarma said if Uniform Civil Code is not implemented then polygamy system will continue
हिमंता बिस्वा सरमा - फोटो : social media

विस्तार

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा इन दिनों समान नागरिक संहिता को लागू कराने के लिए जोर-शोर से प्रयासरत हैं। आये दिन वो इसको लेकर उनके बयान सामने आ रहे हैं। रविवार को गुवाहाटी में उन्होंने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती है, तो बहुविवाह प्रणाली जारी रहेगी। एक पुरुष एक महिला के मौलिक अधिकारों को कम करते हुए 3-4 बार शादी करेगा। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि हमारी मुस्लिम महिलाओं के अधिक से अधिक हित के लिए समान नागरिक संहिता लागू की जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि हिंदू बेटी-बहनें पहले ही बहु विवाह से सुरक्षित हैं, ऐसे में मुस्लिम महिलाओं और बेटियों को समान नागरिक संहिता के तहत बहुविवाह से सुरक्षा मिलनी चाहिए।
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गौरतलब है कि एक दिन पहले शनिवार को भी उन्होंने समान नागरिक संहिता को लेकर बात की थी। उन्होंने शनिवार को यूनीफॉर्म सिविल कोड को लेकर कहा कि हर कोई समान नागरिक संहिता चाहता है। कोई भी मुस्लिम महिला नहीं चाहती कि उसका पति तीन अन्य पत्नियों को घर लाए। 


उन्होंने कहा था कि किसी भी मुस्लिम महिला से पूछो तो उसका यही जवाब होगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता मेरा मुद्दा नहीं है, यह सभी मुस्लिम महिलाओं का मुद्दा है। अगर उन्हें इंसाफ देना है तो तीन तलाक को खत्म करने के बाद अब यूनीफॉर्म सिविल कोड लाना होगा। 

उन्होंने आगे बोलते हुए कहा था कि असम में मुस्लिम समुदाय का एक धर्म है, लेकिन संस्कृति और मूल के दो अलग-अलग वर्ग हैं। उनमें से एक असम का मूल निवासी है और पिछले 200 वर्षों में उसके प्रवास का कोई इतिहास नहीं है। वह वर्ग चाहता है कि उन्हें विस्थापित मुसलमानों के साथ न मिला दिया जाए और उन्हें एक अलग पहचान दी जाए। 

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