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Himachal Pradesh: एक शख्स की जिद्द के आगे ऐसे झुके सीएम जयराम, सहारा योजना शुरू होने की यह अनूठी दास्तां

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 28 Sep 2022 06:25 PM IST
सार

Himachal Pradesh: 15 जुलाई, 2019 को शुरू हुई 'सहारा योजना' में लाभार्थियों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये मिलते हैं। योजना के तहत पार्किंसन, कैंसर, अधरंग, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, रीनल फेलियर और स्थायी अपंगता के शिकार मरीज कवर होते हैं... 

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Himachal Pradesh: story how CM Jairam thakur starts sahara yojana
Himachal Pradesh: मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सामाजिक कल्याण के लिए शुरू की गई 'सहारा योजना' का फायदा बीस हजार से अधिक जरुरतमंदों को मिल रहा है। प्रदेश में उन लोगों के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है, जो किन्हीं कारणों से दूसरों पर आश्रित हो जाते हैं। प्रदेश सरकार ने तीन साल में इस योजना पर 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि खर्च की है। 'सहारा योजना' शुरू होने की अनूठी दास्तां है। जब जयराम ठाकुर सीएम नहीं बने थे, तब एक व्यक्ति ने उन्हें अपने साथ चलने की जिद्द की। ठाकुर ने समय का हवाला देते हुए उसे बहुत समझाया, लेकिन वह जिद्द पर अड़ा रहा। आखिर वो शख्स कौन था, जिसने जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद  'सहारा योजना' लागू करने के लिए प्रेरित किया।

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सहारा योजना में कई बीमारियों का इलाज

सामाजिक कल्याण की दिशा में एक नया अध्याय लिख रही सहारा योजना के बारे में एक अधिकारी बताते हैं, दूसरों पर आश्रित पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को इससे बड़ा फायदा पहुंचा है। यह योजना उन लोगों के लिए भी सहारा बन चुकी है, जो गंभीर बीमारी या किसी हादसे के कारण दूसरों पर आश्रित हो गए हैं। 15 जुलाई, 2019 को यह योजना शुरू हुई थी। पहले इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रतिमाह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे 29 अगस्त 2020 में बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। सहारा योजना के तहत पार्किंसन, कैंसर, अधरंग, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, रीनल फेलियर और स्थायी अपंगता के शिकार मरीज कवर होते हैं।  

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इस योजना का आइडिया उस वक्त आया था, जब जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री नहीं थे। वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यस्त थे। एक रैली को संबोधित करने के बाद जब वे अगले स्थल की ओर जा रहे थे, तो भीड़ से निकलकर एक व्यक्ति उनके सामने आ गया। हालांकि वह व्यक्ति, जयराम ठाकुर की पहचान के थे। उस व्यक्ति ने ठाकुर से कहा, वे इसी वक्त उनके साथ चलें। एकाएक यह बात सुनकर ठाकुर भी हैरान रह गए। इस तरह की जिद्द, अमूमन कम ही देखने को मिलती है। ठाकुर ने उस व्यक्ति को अपनी व्यस्तता के बारे में बताया, लेकिन वह नहीं माना। उसने जयराम ठाकुर से कहा, आपको किसी से मिलवाना है। आखिर जयराम ने उस व्यक्ति की जिद्द मान ली। जयराम ठाकुर उस व्यक्ति के साथ चल पड़े।

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उस शख्स को देख कर भावुक हो गए जयराम

वे उस व्यक्ति के साथ एक मकान पर पहुंचे। उन्होंने वहां जाकर देखा तो एक व्यक्ति बिस्तर पर लेटा हुआ था। ठाकुर ने निकट जाकर देखा तो वह व्यक्ति चोट ग्रस्त था। बिस्तर पर लेटा व्यक्ति एक हादसे का शिकार हुआ था। उस हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। उस वजह से वह व्यक्ति जिंदगी भर के लिए चलने-फिरने में असमर्थ हो गया। यहां तक कि खान-पान के लिए भी वह परिजनों पर ही आश्रित था। जयराम ठाकुर, उसे देखकर भावुक हो गए। इसके बाद उनके मन में यह बात घर कर गई कि ऐसे हजारों लोग हिमाचल में होंगे, उनके लिए कुछ करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सहारा योजना को लागू किया। स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसे मरीजों को चिह्नित करने में जुटा रहता है, जिन्हें इस योजना के तहत मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता की जरूरत है।



हिमाचल प्रदेश में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। किसी हादसे के कारण वे लोग उम्र भर के लिए असहाय हो चुके हैं। ऐसे लोग इलाज से लेकर खान-पान तक दूसरों पर आश्रित हैं। इनमें कई ऐसे लोग भी हैं जो अपने परिवार की आय का एकमात्र जरिया थे। अब वे असहाय होकर दूसरों पर निर्भर हो गए हैं। कुछ लोगों को उनके जन्म से ही ऐसी शारीरिक समस्या रही है, जिसके चलते वे उम्र भर अपने पैरों पर नहीं खड़े हो सकते। इस तरह के मरीजों और उनके तीमारदारों की मदद के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सहारा योजना शुरू की थी। यह संभवतया देश के किसी राज्य में चलने वाली इकलौती योजना है। देश के अन्य राज्य भी जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए ऐसी योजना शुरू कर सकते हैं।

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