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'कश्मीर' में बेगुनाहों का खून: अमित शाह के दौरे से पहले हुई साजिश का पता लगाने के लिए नॉर्थ ब्लॉक में हुई उच्च स्तरीय बैठक

Thu, 07 Oct 2021 05:26 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 07 Oct 2021 05:26 PM IST
सार

कश्मीर में हालिया हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में कश्मीर में हालात बिगड़ने के पीछे के कारणों पर गौर किया गया और इनके समाधान पर चर्चा की गई। 

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High level meeting on Kashmir violence before visit of Union Home Minister Amit Shah
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

कश्मीर में तीन दिन के दौरान आतंकियों ने पांच नागरिकों की हत्या कर दी। इससे 'दिल्ली' में हलचल शुरू हो गई है। ये हत्याएं उस वक्त हुई हैं, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसी महीने 'कश्मीर' के तीन दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं। 
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कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन हत्याओं को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, कश्मीर में हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। आतंकवाद न तो नोटबंदी से रुका, न धारा 370 हटाने से। केंद्र सरकार सुरक्षा देने में पूरी तरह असफल रही है। हमारे कश्मीरी भाई-बहनों पर हो रहे इन हमलों की हम कड़ी निंदा करते हैं और मृतकों के परिवारों को शोक संवेदनाएं भेजते हैं। 
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गुरुवार को अमित शाह ने एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल, गृह सचिव अजय भल्ला, आईबी चीफ अरविंद कुमार, सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह और बीएसएफ डीजी पंकज सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। 
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कश्मीर घाटी में लगातार हो रही आतंकी वारदातों को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर कश्मीर को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद, खासतौर से पिछले दो तीन माह से कश्मीर में अमन चैन की एक नई सुबह देखने को मिल रही थी। डल झील पर एयर शो आयोजित किया गया। दूसरी तरफ आतंकियों ने अपनी कायराना हरकतें जारी रखीं। 

हालांकि, एलओसी पर सेना ने आतंकियों को घाटी के भीतर नहीं घुसने दिया। दर्जनों आतंकी एलओसी पर ही मार गिराए गए। घाटी में आतंकी संगठनों को नए साथी नहीं मिल पा रहे थे। ये अलग बात है कि आतंकियों की मदद देने के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर और अंडर ग्राउंड वर्कर आज भी मौजूद हैं। 

जम्मू कश्मीर पुलिस में आईजी पद पर तैनात एक अधिकारी बताते हैं, आतंकियों के मददगारों को बाहर निकाला जा रहा है। पिछले दिनों कई सरकारी महकमों में ग्राउंड वर्कर मिले थे।अब इसके लिए सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया गया है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई बैठक में इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा भी कई इनपुट रखे गए थे। सूत्रों का कहना है कि बैठक में इस बात पर चर्चा हुई है कि क्या घाटी में वाकई हिंदू-मुस्लिम जैसा कुछ है। मतलब, हिंदुओं को लेकर मुस्लिम किसी दूसरी राह पर तो नहीं जा रहे हैं। तीन-चार महीनों के दौरान आतंकियों ने जिन लोगों को मारा है, उनमें स्थानीय मुस्लिम भी शामिल हैं। 

इंस्पेक्टर परवेज अहमद, सब इंस्पेक्टर अरशद अहमद मीर, सिपाही बंटू शर्मा, शंकर चौधरी मजदूर, केमिस्ट मक्खन लाल बिंदरु, वीरेंद्र पासवान मजदूर, प्रिंसिपल सुपिंद्र कौर और शिक्षक दीपक चंद आदि लोगों को आतंकियों ने करीब से अपनी गोली का निशाना बनाया था। 

बैठक में इस बिंदु पर चर्चा हुई कि क्या घाटी में मुस्लिमों को लेकर कोई अफवाह तो नहीं फैलाई जा रही है। पुलिस से इनपुट लेकर इन सभी हत्याओं की कड़ियों और परिस्थितियों को आपस में जोड़कर देखा गया। आतंकी संगठन, द रेजिस्टेंस फ्रंट का यह दावा कि आरएसएस के प्रति लगाव, लोगों की मौत का कारण बन सकता है, इस पर भी गौर किया गया। इस पर भी बात हुई कि कश्मीरी पंडितों को लेकर कौन से लोग गलत बातें फैला रहे हैं।
 
डीजीपी दिलबाग सिंह के इस बिंदु पर चर्चा हुई कि इन हत्याओं के पीछे मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर बदनाम करना हो सकता है। सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह, जिनके पास एनआईए के डीजी का अतिरिक्त कार्यभार है, उन्होंने बैठक में आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने बाबत की गई कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी, घाटी में आतंकियों के मददगारों की कमर तोड़ने के बहुत करीब है। अधिकांश मददगार गिरफ्तार हो चुके हैं। उनकी संपत्ति जब्त की गई है। 


बीएसएफ डीजी पंकज सिंह से जम्मू और पंजाब से लगती सीमा को लेकर बातचीत हुई। ड्रोन से हथियार गिराने के मामले कैसे ट्रैस हों, इस बाबत एक तकनीकी सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसमें हाई रेंज रडार से लेकर मोबाइल फ्रीक्वेंसी जाम करने जैसे सिस्टम शामिल हैं।
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