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हाईकोर्ट ने दरोगा अभ्यर्थियों की लंबाई दोबारा नापने का दिया आदेश

Thu, 13 Oct 2016 04:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 13 Oct 2016 04:13 AM IST
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High Court ordered Re-measure the hight of candidates
- फोटो : demo pic

हाईकोर्ट ने दरोगा भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की लंबाई एक बार फिर आईएसआई मानक उपकरणों से नापने का आदेश दिया है। पिछले दिनों सुनवाई के दौरान अदालत में ही अभ्यर्थियों की लंबाई जांची गई। इसमें पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारी भी शामिल हुए। अदालत के सामने ही अभ्यर्थियों नाप जोख के बावजूद समस्या का समाधान नहीं निकला। कोर्ट ने इसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

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मामला 2011 दरोगा भर्ती का है। मनोज कुमार यादव और छह अन्य अभ्यर्थियों को पुलिस भर्ती बोर्ड ने अंतिम चयन के बाद मेडिकल परीक्षण के दौरान बाहर निकाल दिया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई। याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि दरोगा भर्ती परीक्षा के पांच चरण रखे गए थे। पहला शारीरिक मानक, प्रारंभिक लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता, मुख्य लिखित परीक्षा और ग्रुप डिस्कशन।
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शारीरिक मानक के लिए न्यूनतम लंबाई 168 सेंटीमीटर अनिवार्य है। याचीगण की लंबाई मानक उपकरणों से नापी गई और वह 168 या अधिक होने के आधार पर चयनित हो गए। अन्य चरणों की परीक्षाएं भी पास कर अंतिम रूप से चयनित होने के बाद नियुक्ति से पूर्व मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया। मेडिकल परीक्षण में सीने और लंबाई की दोबारा जांच की गई। मेडिकल बोर्ड की जांच में याचीगण को 168 सेंटीमीटर से कम लंबाई होने के आधार पर बाहर कर दिया।

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मेडिकल जांच में सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य की जांच होती है

High Court ordered Re-measure the hight of candidates

अधिवक्ता ने दलील दी कि मेडिकल जांच में सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य की जांच होती है। मानक की जांच में याचीगण पहले ही पास हो चुके हैं। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने अदालत में दोबारा याचीगण की लंबाई जांचने का निर्देश दिया। पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। कोर्ट में मैन्युअली लंबाई नापी गई तो नतीजा मेडिकल बोर्ड की नाप से अलग आया।

अदालत ने निर्णय दिया कि चूंकि याचीगण 2011 से चयन प्रक्रिया में शामिल रहे हैं और अंतिम रूप से चयनित हो चुके हैं। यदि भर्ती बोर्ड को किसी त्रुटि के आधार पर निर्णय लेना था तो इसका कारण स्पष्ट करना चाहिए था। कारण स्पष्ट किए बिना लंबाई दोबारा जांचने का औचित्य नहीं है। बोर्ड को तीन सप्ताह में मानक उपकरण से लंबाई की जांच कराकर निर्णय लेने के लिए कहा है।

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