{"_id":"5c3488aabdec2256a47ccc69","slug":"high-court-dismisses-petition-seeking-kejriwal-removal-of-cm-post","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका उच्च न्यायालय में खारिज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका उच्च न्यायालय में खारिज
Tue, 08 Jan 2019 04:55 PM IST
Avdhesh Kumar
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 08 Jan 2019 04:55 PM IST
विज्ञापन
arvind kejriwal
- फोटो : ट्विटर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप नेता अरिवंद केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक मामले में मुकदमा चलने के आधार पर उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिये दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वी के राव की पीठ ने कहा कि इस मामले में मुकदमा अभी भी लंबित है और निर्वाचित सदस्यों को इस तरह से हटाया नहीं जा सकता।
पीठ ने कहा, ‘‘मुकदमा अब भी चल रहा है। वह बरी हो सकते हैं। तब आप क्या करेंगे? आप उनके दोषी ठहराए जाने के बाद आएं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इसके कुछ दम नहीं है, इसे खारिज किया जाता है।’’
अदालत अधिवक्ता हरिनाथ राम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उपराज्यपाल को केजरीवाल तथा दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर हमले से जुड़े आपराधिक मामले में आरोपी अन्य मंत्रियों को तुरंत बर्खास्त करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
याचिका में आरोप लगाया गया कि केजरीवाल ने संविधान के तहत ली गई शपथ का उल्लंघन किया क्योंकि वह अन्य निर्वाचित सदस्यों के साथ साजिश रचकर हिंसा के कृत्यों में कथित रूप से संलिप्त हुए।
विज्ञापन
पीठ ने कहा, ‘‘मुकदमा अब भी चल रहा है। वह बरी हो सकते हैं। तब आप क्या करेंगे? आप उनके दोषी ठहराए जाने के बाद आएं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इसके कुछ दम नहीं है, इसे खारिज किया जाता है।’’
विज्ञापन
अदालत अधिवक्ता हरिनाथ राम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उपराज्यपाल को केजरीवाल तथा दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर हमले से जुड़े आपराधिक मामले में आरोपी अन्य मंत्रियों को तुरंत बर्खास्त करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
याचिका में आरोप लगाया गया कि केजरीवाल ने संविधान के तहत ली गई शपथ का उल्लंघन किया क्योंकि वह अन्य निर्वाचित सदस्यों के साथ साजिश रचकर हिंसा के कृत्यों में कथित रूप से संलिप्त हुए।