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समलिंगी जोड़े को संरक्षण देने से हाईकोर्ट का इंकार, दो युवकों ने साथ रहने के लिए दाखिल की थी याचिका
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 28 Sep 2018 01:05 AM IST
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हाईकोर्ट ने समलैंगिक संबंध रखने वाले दो युवकों को संरक्षण का आदेश देने से इंकार कर दिया है। दोनों युवकों ने परिवार वालों का उत्पीड़न रोकने की मांग में याचिका दाखिल की थी। युवकों का कहना था कि वह दोनों गहरे दोस्त हैं। एक-दूसरे से प्यार करते हैं और साथ रहना चाहते हैं मगर उनके परिवार वाले परेशान कर रहे हैं। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को रद्द कर दिया है इसलिए उनको संरक्षण दिया जाए।
शामली के गुलफाम और मुन्नवर की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट का कहना था कि उनका संबंध जनसंख्या नियंत्रण के लिए अच्छा हो सकता है मगर यह एक सामाजिक समस्या है। कोर्ट ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। याचीगण का कहना था कि उनके पिता पप्पू और जब्बर उनको धमका रहे हैं। उन्होंने एसपी से इसकी शिकायत की थी मगर पुलिस ने कुछ नहीं किया।
सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने गे सेक्स को वैध करार देते हुए 158 साल पुराना कानून रद्द कर दिया है इसलिए उनका कृत्य अपराध नहीं है। बता दें कि हाईकोर्ट में आम तौर पर अपनी मर्जी से विवाह करने वाले युवक युवती इस आधार पर संरक्षण मांगते हैं कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह करने का हक है इसलिए उनको संरक्षण प्रदान किया जाए।
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शामली के गुलफाम और मुन्नवर की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट का कहना था कि उनका संबंध जनसंख्या नियंत्रण के लिए अच्छा हो सकता है मगर यह एक सामाजिक समस्या है। कोर्ट ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। याचीगण का कहना था कि उनके पिता पप्पू और जब्बर उनको धमका रहे हैं। उन्होंने एसपी से इसकी शिकायत की थी मगर पुलिस ने कुछ नहीं किया।
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सुप्रीमकोर्ट कोर्ट ने गे सेक्स को वैध करार देते हुए 158 साल पुराना कानून रद्द कर दिया है इसलिए उनका कृत्य अपराध नहीं है। बता दें कि हाईकोर्ट में आम तौर पर अपनी मर्जी से विवाह करने वाले युवक युवती इस आधार पर संरक्षण मांगते हैं कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह करने का हक है इसलिए उनको संरक्षण प्रदान किया जाए।
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