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Heat: कितना ऊपर जाएगा पारा, इससे वातावरण में कैसा बदलाव, ज्यादा गर्मी से लोगों की सेहत पर क्या असर?
Mon, 27 May 2024 02:52 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 27 May 2024 02:52 PM IST
सार
Heat Wave In India: उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों समेत देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में लोग गर्मी का प्रकोप झेल रहे हैं। देश के कई क्षेत्रों में पारा 45 से 48 डिग्री के बीच बना हुआ है। 26 मई को देशभर में फलौदी (पश्चिमी राजस्थान) में सबसे अधिक तापमान 49.8°C दर्ज किया गया।
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तापमान
- फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
भीषण गर्मी ने इन दिनों त्राहिमाम मचा रखा है। उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों समेत देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में प्रचंड गर्मी है। नौतपा में देश का आधा हिस्सा तप रहा है। राजस्थान के फलौदी में बीते दिन पारा करीब 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। देश के कई क्षेत्रों में पारा 45 से 48 डिग्री के बीच बना हुआ है। महाराष्ट्र के अकोला में स्थिति यहां तक आ गई कि जिला प्रशासन ने को धारा 144 लगानी पड़ी।
गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। देशभर के अस्पतालों में लू लगने से बीमार होने वालों की संख्या में तेजी देखी गई है। ऐसे में सवाल है कि आखिर तापमान अभी कितना ऊपर जा सकता है? इसका सेहत पर कितना असर पड़ता है? गर्मी का वातावरण पर क्या असर पड़ रहा है?
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गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। देशभर के अस्पतालों में लू लगने से बीमार होने वालों की संख्या में तेजी देखी गई है। ऐसे में सवाल है कि आखिर तापमान अभी कितना ऊपर जा सकता है? इसका सेहत पर कितना असर पड़ता है? गर्मी का वातावरण पर क्या असर पड़ रहा है?
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ताजमहल, गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पहले जानते हैं कैसा है मौसम?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को बताया कि राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में लू चल रही है। इन राज्यों में रात के समय भी अत्यधिक गर्मी पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी पारा 40 के ऊपर बना हुआ है और लू चल रही है।
पहाड़ों पर भी पसीने छूट रहे हैं। कश्मीर के काजीगुंड में रविवार को 43, कोकरनाग में 22 और जम्मू संभाग के भद्रवाह में 23 साल बाद मई में दूसरा सबसे उच्चतम तापमान दर्ज किया गया है। प्रदेश के सभी पहाड़ों पर भी दिन का पारा सामान्य से 4 से 9 डिग्री ऊपर चल रहा है। जम्मू में अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को बताया कि राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में लू चल रही है। इन राज्यों में रात के समय भी अत्यधिक गर्मी पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी पारा 40 के ऊपर बना हुआ है और लू चल रही है।
पहाड़ों पर भी पसीने छूट रहे हैं। कश्मीर के काजीगुंड में रविवार को 43, कोकरनाग में 22 और जम्मू संभाग के भद्रवाह में 23 साल बाद मई में दूसरा सबसे उच्चतम तापमान दर्ज किया गया है। प्रदेश के सभी पहाड़ों पर भी दिन का पारा सामान्य से 4 से 9 डिग्री ऊपर चल रहा है। जम्मू में अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
रविवार से लू का रेड अलर्ट
- फोटो : एएनआई
तो आगे कैसा रहेगा मौसम?
अमर उजाला से बातचीत में आईएमडी की वैज्ञानिक सोमा सेन रॉय ने बताया कि पंजाब में, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन दिन तक रेड अलर्ट चलेगा। उसके बाद से हर एक क्षेत्र से तापमान घटना लगेगा। ऑरेंज अलर्ट में चले जाएंगे। इंटेंसिटी रहेगी लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन कम होता जाएगा, क्योंकि थोड़ा पश्चिमी विक्षोभ भी आ रहा है। इसके कारण धीरे-धीरे तापमान घटने लगेगा। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में तीन दिन तक तापमान बना रहेगा। वहीं पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह स्थिति दो दिन तक रहेगी।
आईएमडी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान के अधिकतर क्षेत्रों में 29 मई तक प्रचंड गर्मी जारी रहेगी। इस दौरान यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी भीषण गर्मी महसूस की जाएगी।
पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय समेत पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात रेमल के तट से टकराने के बाद इन इलाकों में बारिश हो सकती है और तेज हवाएं चल सकती हैं।
अमर उजाला से बातचीत में आईएमडी की वैज्ञानिक सोमा सेन रॉय ने बताया कि पंजाब में, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन दिन तक रेड अलर्ट चलेगा। उसके बाद से हर एक क्षेत्र से तापमान घटना लगेगा। ऑरेंज अलर्ट में चले जाएंगे। इंटेंसिटी रहेगी लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन कम होता जाएगा, क्योंकि थोड़ा पश्चिमी विक्षोभ भी आ रहा है। इसके कारण धीरे-धीरे तापमान घटने लगेगा। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में तीन दिन तक तापमान बना रहेगा। वहीं पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह स्थिति दो दिन तक रहेगी।
आईएमडी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान के अधिकतर क्षेत्रों में 29 मई तक प्रचंड गर्मी जारी रहेगी। इस दौरान यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी भीषण गर्मी महसूस की जाएगी।
पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय समेत पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात रेमल के तट से टकराने के बाद इन इलाकों में बारिश हो सकती है और तेज हवाएं चल सकती हैं।
गर्मी का प्रकोप जारी
- फोटो : पीटीआई
भीषण गर्मी का स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है?
नोएडा स्थित एक अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने बताया कि धूप के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी या निर्जलीकरण) सबसे आम परेशनी है। शुरुआत में पानी की कमी होने के कारण मुंह सूखने, कमजोरी-रक्तचाप कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। निर्जलीकरण की गंभीर स्थिति में शरीर से पसीने के जरिए ज्यादा पानी निकल जाने पर एक्यूट किडनी इंजरी और लिवर से संबंधित जटिलताओं का खतरा भी हो सकता है। निर्जलीकरण की समस्या में पेशाब का उत्पादन भी कम हो हो जाता और जिसका किडनी की सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।
गर्मी के कारण होने वाली दूसरी परेशानी है- लू लगना। ज्यादा धूप के संपर्क या लू लगने की स्थिति बेहोशी, चक्कर आने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। लू की गंभीर स्थिति मस्तिष्क की कोशिकाओं और तंत्रिकाओं को भी प्रभावित करने लगती है। फ्लुइड लॉस (द्रव असंतुलन यानी शरीर की क्षमता से अधिक पानी या तरल पदार्थ का खोना) ज्यादा होने के साथ स्वास्थ्य जटिलताएं और गंभीर हो सकती हैं।
नोएडा स्थित एक अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव ने बताया कि धूप के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी या निर्जलीकरण) सबसे आम परेशनी है। शुरुआत में पानी की कमी होने के कारण मुंह सूखने, कमजोरी-रक्तचाप कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। निर्जलीकरण की गंभीर स्थिति में शरीर से पसीने के जरिए ज्यादा पानी निकल जाने पर एक्यूट किडनी इंजरी और लिवर से संबंधित जटिलताओं का खतरा भी हो सकता है। निर्जलीकरण की समस्या में पेशाब का उत्पादन भी कम हो हो जाता और जिसका किडनी की सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।
गर्मी के कारण होने वाली दूसरी परेशानी है- लू लगना। ज्यादा धूप के संपर्क या लू लगने की स्थिति बेहोशी, चक्कर आने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। लू की गंभीर स्थिति मस्तिष्क की कोशिकाओं और तंत्रिकाओं को भी प्रभावित करने लगती है। फ्लुइड लॉस (द्रव असंतुलन यानी शरीर की क्षमता से अधिक पानी या तरल पदार्थ का खोना) ज्यादा होने के साथ स्वास्थ्य जटिलताएं और गंभीर हो सकती हैं।
भीषण गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
गर्मी का वातावरण पर क्या असर पड़ रहा है?
इससे पहले मई की शुरुआत में यूरोपीय संघ की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने कहा था कि यह लगातार 11वां महीना था जब तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल माह में औसत तापमान 15.03 डिग्री सेल्सियस था। जलवायु एजेंसी ने कहा कि पिछले 12 महीनों (मई 2023-अप्रैल 2024) के लिए वैश्विक औसत तापमान सबसे अधिक दर्ज किया गया है, जो 1850-1900 पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.61 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इस गर्मी को दुनियाभर में सूखे, जंगल की आग और बाढ़ का कारण माना जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते विश्व को मौसम की गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला में प्रकाशित ये लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
इससे पहले मई की शुरुआत में यूरोपीय संघ की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने कहा था कि यह लगातार 11वां महीना था जब तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अप्रैल माह में औसत तापमान 15.03 डिग्री सेल्सियस था। जलवायु एजेंसी ने कहा कि पिछले 12 महीनों (मई 2023-अप्रैल 2024) के लिए वैश्विक औसत तापमान सबसे अधिक दर्ज किया गया है, जो 1850-1900 पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.61 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इस गर्मी को दुनियाभर में सूखे, जंगल की आग और बाढ़ का कारण माना जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते विश्व को मौसम की गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला में प्रकाशित ये लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।