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समलैंगिकों के विवाह पर सुनवाई: SC में क्या बोले याचिकाकर्ता, सरकार ने मंजूरी न देने पर क्या तर्क दिया, जानें

Tue, 18 Apr 2023 01:42 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 18 Apr 2023 01:42 PM IST
सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में एसके कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हेमा कोहली शामिल हैं।

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Hearing on same sex marriage What did the petitioner say in the Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

समलैंगिकों के विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की पीठ ने सुनवाई जारी है। केंद्र ने याचिकाओं की योग्यता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की। उसने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि पहले याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे पर सुनवाई की जाए। उसके बाद मुख्य मामले की सुनवाई हो। बता दें, इस मामले पर पिछले महीने कम से कम 15 याचिकाएं बड़ी बेंच को रेफर हो चुकी हैं।

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बता दें, भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ में एसके कौल, एस रवींद्र भट, पीएस नरसिम्हा और हेमा कोहली शामिल हैं। मामले को लेकर केंद्र की ओर से एसजी तुषार मेहता जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी हैं।

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इन मुद्दों को रखा गया

  • आज जो बहस सामाजिक-कानूनी संस्था प्रदान करने या बनाने के लिए होनी है। क्या वह इस अदालत या संसद का मंच होना चाहिए?
     
  • यह कोई ऐसा मामला नहीं है जिस पर उस तरफ के 5 व्यक्ति, इस तरफ 5, बेंच के 5 बुद्धजीवी लोग बहस करें। इस पर किसान, बिजनैसमेन और अन्य लोगों का कोई तर्क नहीं पता है। 
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  • याचिकाकर्ता का कहना है कि वह ऐसे लोग हैं जो समान लिंग के हैं। उन्हें विषमलैंगिक समूह के रूप में संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्त हैं। अधिकारों में एकमात्र बाधा 377 थी। जिसे हटा दिया गया है।
     
  • यदि हमारे अधिकार राज्य के समान हैं, तो हम 14,15,19 और 21 के तहत अपने अधिकारों का पूरा आनंद लेना चाहते हैं।
     
  • पिछले 100 वर्षों में शादी को लेकर कई विचार बदल गए हैं। पहले हम बाल विवाह करते थे, अस्थाई विवाह करते थे, एक व्यक्ति कितनी भी बार शादी कर सकता था। यह सब बदल चुका है। हिंदू विवाह अधिनियम को लेकर भी काफी कुछ विरोध हुआ था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 

     
  • हम बूढ़े हो रहे हैं। हम भी शादी करना चाहते हैं। आज समाज में क्या स्थिति है। कहीं भी जाएं तो लोग अजीब से देखते हैं और गे बोलते हैं। यह हमारे ए 21 के तहत अधिकार का उल्लंघन है।
     
  • LGBTQ लोगों को बैंक खाते, शादी जैसे रोजमर्रा के अधिकारों से वंचित रखा जाता है। इससे उन्हें बीमा जैसे कई अन्य मुद्दों को हल करने में मदद मिलेगी।
     
  • 50 से 70 साल पहले जो विधायी मसौदा तैयार किया गया था, उसकी वजह से हम अपना हक नहीं खो सकते है। 
     
  • यहां दो महत्वपूर्ण शब्द हैं विवाह और व्यक्ति। इसलिए सीमित दायरे में भी बेंच को थोड़ा और आगे बढ़ना चाहिए। 
     
  • समाज ने समलैंगिक जोड़ों को स्वीकार कर लिया है। यह काफी अच्छा है, लोग बड़ी संख्या में साथ रहते हैं। 

 

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