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उच्चतम न्यायालय में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता मामले में सुनवाई पूरी

Tue, 28 Aug 2018 03:42 PM IST
नई दिल्ली, भाषा
नई दिल्ली, भाषा Updated Tue, 28 Aug 2018 03:42 PM IST
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Hearing on plea of disqualification of people representatives with criminal background is complete

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता को लेकर दायर याचिका पर आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई पूरी हो चुकी है। लेकिन इसपर फैसला अभी नहीं आया है। यह याचिकाएं राजनीति के अपराधीकरण पर अंकुश लगाने के लिए दायर की गई थीं। जिनमें कहा गया है कि आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे जनप्रतिनिधियों को दोषसिद्धि से पहले ही अयोग्य घोषित किया जाए। इनपर फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इन याचिकाओं पर याचिकाकर्ताओं के साथ ही निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा शामिल हैं।
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केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने राजनीतिक व्यवस्था को स्वच्छ करने की शीर्ष अदालत की मंशा की तो सराहना की लेकिन साथ ही ये भी कहा कि न्यायपालिका विधायिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। वेणुगोपाल ने दोष सिद्ध होने तक व्यक्ति को निर्दोष मानने की अवधारणा का जिक्र किया और कहा कि न्यायालय व्यक्ति के मत देने के अधिकार पर शर्त नहीं लगा सकती है और इसमें चुनाव लड़ने का अधिकार भी शामिल है।
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पीठ ने कहा कि उसकी मंशा विधायिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने की नहीं है परंतु मतदाताओं को प्रत्याशी की पृष्ठभूमि के बारे में जानने का अधिकार है। पीठ ने जानना चाहा कि क्या न्यायालय निर्वाचन आयोग से इस तरह की शर्त निर्धारित करने के लिये कह सकता है कि राजनीतिक दल चुनाव से पहले अपने सदस्यों की आपराधिक पृष्ठभूमि सार्वजनिक करेंगे ताकि आम जनता को प्रत्याशियों और उनके आपराधिक अतीत, यदि कोई हो, के बारे में जानकारी मिल सके।


शीर्ष अदालत ने इससे पहले राजनीति के अपराधीकरण को 'गंदगी' बताया था और कहा था कि वह निर्वाचन आयोग को यह निर्देश देने पर विचार कर सकता है कि राजनीतिक दल अपने सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामलों को सार्वजनिक करें ताकि मतदाताओं को पता लग सके कि ऐसे दलों में कितने 'कथित रूप से दागी' शामिल हैं। न्यायालय गैर सरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन सहित कई व्यक्तियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इनमें अनुरोध किया गया है कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनावी राजनीति में शामिल होने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। जिनके खिलाफ आपराधिक मामलों में आरोप तय हो चुके हैं।

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