SC: पतंजलि विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट की चिंता, क्या लाइसेंसिंग संस्था ने कानून के अनुसार कार्रवाई की?
सुप्रीम कोर्ट में आज पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई हुई। योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की खिंचाई की।
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सुप्रीम कोर्ट में आज पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई हुई। योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की खिंचाई की। संस्था द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण शीर्ष अदालत के 10 अप्रैल के आदेश के बाद ही कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए सक्रिय हो गया है।
10 अप्रैल को सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई थी। कहा था कि वह इसे हल्के में नहीं लेगी, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता कि प्राधिकरण ने अपनी आंखें जानबूझकर बंद रखी हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर आप सहानुभूति और करुणा चाहते हैं तो अदालत के प्रति ईमानदार रहें। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता यह है कि क्या लाइसेंसिंग संस्था ने मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की है। पीठ ने मामले को 14 मई को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।
हालांकि, इससे पहले 19 अप्रैल को मामले में सुनवाई हुई थी। इस दौरान बाबा रामदेव और बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्होंने अपनी ओर से हुई गलतियों के लिए समाचार पत्रों में बिना शर्त माफी प्रकाशित की है। वहीं, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामदेव और बालकृष्ण के वकील से समाचार पत्रों में प्रकाशित माफीनामे को दो दिनों के भीतर रिकॉर्ड में पेश करने को कहा था।
67 समाचार पत्रों में छपवाया माफीनामा
रामदेव और बालकृष्ण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि वे अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए अतिरिक्त विज्ञापन भी जारी करेंगे। बताया कि उन्होंने देश भर के 67 समाचार पत्रों में माफीनामा प्रकाशित कराया है।
16 अप्रैल को रामदेव-बालकृष्ण को दी हिदायत
शीर्ष अदालत ने रामदेव और बालकृष्ण को 16 अप्रैल को हिदायत दी थी कि वे ‘एलोपैथी को नीचा दिखाने’ का कोई प्रयास नहीं करें। अदालत ने उन्हें पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के भ्रामक विज्ञापन के मामले में एक सप्ताह के भीतर 'सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और पछतावा प्रकट करने' की अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह अभी उन्हें इस चरण में राहत नहीं देगी।
आईएमए ने 2022 में दायर की याचिका
बता दें कि शीर्ष अदालत 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कोविड टीकाकरण और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ एक दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है।