फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Hearing in Supreme Court in Patanjali's misleading advertisement case

SC: पतंजलि विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट की चिंता, क्या लाइसेंसिंग संस्था ने कानून के अनुसार कार्रवाई की?

Tue, 30 Apr 2024 02:11 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 30 Apr 2024 02:11 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में आज पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई हुई। योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की खिंचाई की।

विज्ञापन
Hearing in Supreme Court in Patanjali's misleading advertisement case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में आज पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़े भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई हुई। योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण की खिंचाई की। संस्था द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण शीर्ष अदालत के 10 अप्रैल के आदेश के बाद ही कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए सक्रिय हो गया है।  

विज्ञापन

10 अप्रैल को सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने निष्क्रियता के लिए उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई थी। कहा था कि वह इसे हल्के में नहीं लेगी, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता कि प्राधिकरण ने अपनी आंखें जानबूझकर बंद रखी हैं। 

विज्ञापन

पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर आप सहानुभूति और करुणा चाहते हैं तो अदालत के प्रति ईमानदार रहें। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता यह है कि क्या लाइसेंसिंग संस्था ने मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की है। पीठ ने मामले को 14 मई को सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि, इससे पहले 19 अप्रैल को मामले में सुनवाई हुई थी। इस दौरान बाबा रामदेव और बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्होंने अपनी ओर से हुई गलतियों के लिए समाचार पत्रों में बिना शर्त माफी प्रकाशित की है। वहीं, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामदेव और बालकृष्ण के वकील से समाचार पत्रों में प्रकाशित माफीनामे को दो दिनों के भीतर रिकॉर्ड में पेश करने को कहा था। 

67 समाचार पत्रों में छपवाया माफीनामा 
रामदेव और बालकृष्ण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि वे अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए अतिरिक्त विज्ञापन भी जारी करेंगे। बताया कि उन्होंने देश भर के 67 समाचार पत्रों में माफीनामा प्रकाशित कराया है।  




 
16 अप्रैल को रामदेव-बालकृष्ण को दी हिदायत 
शीर्ष अदालत ने रामदेव और बालकृष्ण को 16 अप्रैल को हिदायत दी थी कि वे ‘एलोपैथी को नीचा दिखाने’ का कोई प्रयास नहीं करें। अदालत ने उन्हें पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के भ्रामक विज्ञापन के मामले में एक सप्ताह के भीतर 'सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और पछतावा प्रकट करने' की अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह अभी उन्हें इस चरण में राहत नहीं देगी। 

आईएमए ने 2022 में दायर की याचिका 
बता दें कि शीर्ष अदालत 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कोविड टीकाकरण और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के खिलाफ एक दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed