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Mumbai: आवारा कुत्तों के बाद मुंबई में कबूतरों पर घमासान, बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC से फैसला पटलने पर पूछे सवाल

Wed, 13 Aug 2025 04:35 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 13 Aug 2025 04:35 PM IST
सार

बुधवार को नगर निगम ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह दादर कबूतरखाना में सुबह दो घंटे तक नियंत्रित तरीके से कबूतरों को दाना खिलाने की अनुमति देने के लिए तैयार है। अब  हाईकोर्ट ने बीएमसी पर अपने नए फैसले को लेकर सवाल पूछे हैं। 

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Hearing in Bombay High Court on petition regarding feeding pigeons in Mumbai
दादर का कबूतर खाना - फोटो : ANI

विस्तार

कुत्तों को लेकर जारी बहस के बीच मुंबई में कबूतरों पर घमासान छिड़ा हुआ है। मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पाबंदी लगा दी थी। जिसके बाद कोर्ट के फैसले पर पक्ष और विपक्ष में बहसबाजी शुरू हो गई है। बुधवार को एक बार फिर से मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से संबंधित याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि शहर में कबूतरखानों (कबूतरों के दाना डालने के स्थान) को बंद करने और कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाने का बीएमसी का निर्णय जन स्वास्थ्य के व्यापक हित में था, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखी जानी चाहिए। 

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बीएमसी ने हाईकोर्ट को बताया कि वह कुछ शर्तों के साथ सुबह 6 से 8 बजे के बीच कबूतरों को दाना खिलाने की अनुमति देने को तैयार है। इस पर हाईकोर्ट ने बीएमसी से कहा, आप ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकते हैं? पहले आपने जनहित में फैसला लिया, अब एक व्यक्ति कुछ कह रहा है, जिसके बाद आपने अपना फैसला बदल दिया है। आपको कानूनी प्रक्रिया से गुजरना चाहिए।  
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क्या कहा हाईकोर्ट ने?
न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने कहा कि ऐसी कोई भी अनुमति देने से पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को पहले एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर आपत्तियां आमंत्रित करनी होंगी और फिर दादर स्थित इस लोकप्रिय स्थल पर पक्षियों को नियंत्रित दाना खिलाने की अनुमति देने पर निर्णय लेना होगा।
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हाईकोर्ट ने कहा, आप (बीएमसी) अब केवल भोजन देने की अनुमति नहीं दे सकते, क्योंकि आपने जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पहले ही इसे बंद करने का निर्णय ले लिया है। आपको अच्छी तरह सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद आपको एक नोटिस जारी करना होगा और लोगों से आपत्तियां आमंत्रित करनी होंगी और फिर निर्णय लेना होगा। पीठ ने पुष्टि की कि एक बार जब आप लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले लेते हैं, तो आपको उस पवित्रता को बनाए रखना होगा।

क्या है मामला? 
पिछले हफ्ते बीएमसी ने लोगों को पक्षियों को दाना डालने से रोकने के लिए दादर कबूतरखाना को ढक दिया था। इस कदम के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने तिरपाल को जबरन हटा दिया था। इसके बाद कुछ लोगों ने बीएमसी को एक आवेदन प्रस्तुत कर कबूतरों को नियंत्रित भोजन देने की अंतरिम व्यवस्था की मांग की थी।

 

मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट में मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील हरीश पांड्या ने बताया कि सात अगस्त को जब सुनवाई हुई थी, तब कोर्ट ने कहा था कि यह मामला उनके विशेषज्ञता के दायरे से बाहर है, इसलिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए। उस दिन किसी कारणवश ए़डवोकेट जनरल कोर्ट में हाजिर नहीं हो पाए थे। लेकिन आज वे कोर्ट में हाजिर हुए। उन्होंने कोर्ट के सामने एक सूची पेश की, जिसमें विशेषज्ञों, संस्थानों और पशु कल्याण बोर्डों के नाम शामिल हैं।

इनकी एक समिति 20 अगस्त तक बनाई जाएगी। इसके बाद समिति की पहली बैठक होगी और फिर जो भी जरूरी कार्रवाई है, वह की जाएगी। समिति की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाएगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों को यह अनुमति दी कि अगर उनके पास कोई भी मेडिकल जानकारी या सामग्री हो, तो वे समिति को सौंप सकते हैं। कोर्ट समिति की रिपोर्ट देखने के बाद आगे फैसला लेगा।

कोर्ट ने सात अगस्त को यह भी कहा था कि अगर कोई कबूतरों को दाना खिलाना चाहता है, तो पहले बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) से अनुमति मांगे। इसके बाद तय किया जाएगा कि यह किया जा सकता है या नहीं। दाना खिलाने का समय भी बीएमसी ही तय करेगी।
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