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Tamil Nadu: पुलिस अधीक्षक के खिलाफ SC-ST आयोग के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जानें पूरा मामला
Mon, 19 Dec 2022 07:36 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 Dec 2022 07:36 PM IST
सार
एसपी कुप्पुसामी चेट्टियार के मुताबिक, उनका एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एम. परमानंदम के साथ जमीन को लेकर विवाद हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कोयंबटूर के एसपी ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। जाति का जिक्र करते हुए दुर्व्यवहार किया।
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विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु राज्य एससी/एसटी आयोग के एक हालिया आदेश पर रोक लगा दी है। आयोग ने अपने 28 दिसंबर के आदेश में तिरुनेलवेली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाया था और उन्हें गिरफ्तार करने और आयोग के समक्ष पेश करने के लिए जमानती वारंट जारी किया था।
जस्टिस जी. चंद्रशेखरन ने तिरुनेलवेली के एसपी पी. सरवनन की एक आपराधिक मूल याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए निषेधाज्ञा दी।
एसपी कुप्पुसामी चेट्टियार के मुताबिक, उनका एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एम. परमानंदम के साथ शिवंथिपट्टी में जमीन को लेकर विवाद हुआ था। परमानंदम ने आरोप लगाया था कि कोयंबटूर के कुप्पुसामी चेट्टियार ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है और उनकी जाति का जिक्र करते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद परमानंदम ने सीधे 2004 में एससी/एसटी आयोग का रुख किया।
आयोग ने इस साल जून में शिकायत का संज्ञान लिया और सरवनन को दो मौकों पर पेश होने का निर्देश दिया। एसपी कथित तौर पर इस मामले की जांच पर एक रिपोर्ट के साथ पेश नहीं हुए। आयोग ने इस साल 2 जून को उन पर पांच सौ रुपये का जु्र्माना लगाया और उन्हें 28 दिसंबर को पेश होने का निर्देश दिया।
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इससे निराश सरवनन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और बताया कि परमानंदम ने न्यायिक पुलिस के पास शिकायत दर्ज किए बिना सीधे आयोग का रुख किया। उन्होंने पूर्व में आयोग के सामने पेश होने में असमर्थता के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी और अपने अधीनस्थ (डीएसपी) को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा था। सरवनन ने तर्क दिया कि इस पर विचार किए बिना आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति के प्रारूप में आदेश जारी कर दिया।
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जस्टिस जी. चंद्रशेखरन ने तिरुनेलवेली के एसपी पी. सरवनन की एक आपराधिक मूल याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए निषेधाज्ञा दी।
एसपी कुप्पुसामी चेट्टियार के मुताबिक, उनका एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एम. परमानंदम के साथ शिवंथिपट्टी में जमीन को लेकर विवाद हुआ था। परमानंदम ने आरोप लगाया था कि कोयंबटूर के कुप्पुसामी चेट्टियार ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है और उनकी जाति का जिक्र करते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद परमानंदम ने सीधे 2004 में एससी/एसटी आयोग का रुख किया।
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आयोग ने इस साल जून में शिकायत का संज्ञान लिया और सरवनन को दो मौकों पर पेश होने का निर्देश दिया। एसपी कथित तौर पर इस मामले की जांच पर एक रिपोर्ट के साथ पेश नहीं हुए। आयोग ने इस साल 2 जून को उन पर पांच सौ रुपये का जु्र्माना लगाया और उन्हें 28 दिसंबर को पेश होने का निर्देश दिया।
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इससे निराश सरवनन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और बताया कि परमानंदम ने न्यायिक पुलिस के पास शिकायत दर्ज किए बिना सीधे आयोग का रुख किया। उन्होंने पूर्व में आयोग के सामने पेश होने में असमर्थता के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी और अपने अधीनस्थ (डीएसपी) को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा था। सरवनन ने तर्क दिया कि इस पर विचार किए बिना आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति के प्रारूप में आदेश जारी कर दिया।