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बेंगलुरूः सड़कों के गड्ढे भरने के काम की गुणवत्ता की होगी जांच, हाई कोर्ट ने बीबीएमपी से मांगी रिपोर्ट
Wed, 02 Nov 2022 06:28 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 02 Nov 2022 06:28 PM IST
सार
अदालत ने एनएचएआई के मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से काम का निरीक्षण करने या एक वरिष्ठ इंजीनियर को सर्वेक्षण करने और एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
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Karnataka High Court
- फोटो : PTI
विस्तार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) और उसके ठेकेदारों द्वारा गड्ढों को भरने या मरम्मत कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण करने और चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश पीबी वराले और न्यायमूर्ति अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने बेंगलुरु में सड़कों की खराब स्थिति के संबंध में एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया। शहर के नागरिक निकाय बीबीएमपी ने बुधवार को किए गए गड्ढे भरने के काम की स्थिति पर अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी।
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अदालत को बताया गया कि पहचाने गए 25,032 गड्ढों में से 13,843 को भर दिया गया है। कई और मरम्मत के विभिन्न चरणों में हैं और 6,689 गड्ढों को चार सप्ताह के भीतर भर दिया जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका के छह साल बाद भी उसके कई आदेशों के साथ-साथ बीबीएमपी द्वारा पेश कई रिपोर्ट और हलफनामे के बावदजूद बेंगलुरु शहर में सड़क की स्थिति नहीं बदली है और शहर के नागरिक इससे पीड़ित हैं। गड्ढों के कारण होने वाली मौतों की ओर भी इशारा करते हुए अदालत ने कहा कि हमने विभिन्न आदेशों में देखा है कि सड़कों और विशेष रूप से गड्ढों की स्थिति के कारण लोगों की मौत भी हो रही है।
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सुनवाई के दौरान यह भी पाया गया कि बीबीएमपी शहर में सड़कों की मरम्मत में लगी हुई है। जिन ठेकेदारों को बीबीएमपी ने काम सौंपा है, उनके द्वारा किए गए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता के बारे में पूछे जाने पर अदालत से कहा गया कि निजी ठेकेदारों द्वारा काम शुरू करने के बाद नगर निकाय के अधिकारी स्वयं संतुष्टि प्रमाण पत्र दाखिल करते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया से नाखुश हाई कोर्ट ने कहा कि बीबीएमपी द्वारा निजी ठेकेदारों द्वारा कराए गए कार्यों का कोई स्वतंत्र तृतीय पक्ष मूल्यांकन नहीं होता है। इसके बाद अदालत ने एनएचएआई के मुख्य अभियंता को व्यक्तिगत रूप से काम का निरीक्षण करने या एक वरिष्ठ इंजीनियर को सर्वेक्षण करने और एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
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एनएचएआई के प्रतिनिधि सर्वेक्षण करेंगे कि क्या गड्ढों की मरम्मत का काम अनुबंध के अनुसार है और यह भी कि क्या काम संतोषजनक है। इसके बाद गड्ढा भरने के कार्य पर स्वतंत्र राय और सुझाव देंगे। रिपोर्ट यह भी बताएगी कि क्या बीबीएमपी द्वारा कर्तव्य में लापरवाही की गई है और ठेकेदारों की विफलता है। कोर्ट ने कहा कि एनएचएआई के सर्वे से पहले से चल रहे काम पर रोक नहीं लगेगी और बीबीएमपी इसे जारी रख सकती है। एचसी ने सोमवार को विशेष रूप से बीबीएमपी को गड्ढे भरने के काम के संबंध में उठाए गए सवालों पर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।