हाजी इरफान: चला गया सियासत का एक बड़ा ‘योद्धा’
- उनकी शालीनता का कायल था हर कोई।
- हर विधानसभा सत्र में रहती थी मौजूदगी।
- हमेशा मजलूमों की लड़ाई लड़ते रहे थे।
- अपने से छोटों को भी हमेशा बड़ा भाई कहा।
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अपने से छोटों को भी हमेशा बड़ा भाई कहा। व्यवहार ऐसा कि अगर कोई एक दफा मिल ले तो बार बार मुलाकात करने की सोचे। उनकी तकरीर बांधे रहती थी लोगों को। उर्दू अल्फाजों के इस्तेमाल से माहौल को इतना पुरखुलूस बना देते कि क्रोध का ताप भी वहां शांत हो जाए। हर विधानसभा सत्र में शामिल होना और क्षेत्र की समस्याओं को शिद्दत के साथ उठाना उनकी प्राथमिकता थी।
सपा की सियासत में हाजी इरफान ने कुछ समय में ही बड़ा नाम कमा लिया था। चाहे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव हों या फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। दोनों से ही मधुर संबंध थे। चाहें किसी ओवरब्रिज का मुद्दा रहा हो या फिर सड़कों के निर्माण का। वह हमेशा डेवलपमेंट के प्रोजेक्टों को लेकर लखनऊ तक की दौड़ करते रहते थे। बिलारी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने विकास के काफी काम कराए भी।
उन्हें करीब से जानने वालों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी समस्या को लेकर उनके पास चला गया तो समाधान ही होता था। शायद ही कभी कोई निराश होकर तो लौटा हो। यही वजह है कि बिलारी विधानसभा क्षेत्र में उनके चाहने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई। जब जिला पंचायत का इलेक्शन हुआ तो उन्होंने अपने बेटे इरफान को चुनाव लड़ाया और जिला पंचायत सदस्य बनवाया।
हाजी इरफान थे बिलारी के पहले विधायक
कुंदरकी और चंदौसी विधानसभा का हिस्सा काटकर बनाई गई बिलारी विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक बने थे मोहम्मद इरफान हमेशा याद रखे जाएंगे। छह मार्च 2012 को मोहम्मद इरफान नवगठित बिलारी विधानसभा के पहले विधायक बने।
विधायक की योग्यता की वजह से उन्हें प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों की स्टिंग कमेटी का सदस्य नामित किया तथा उत्तर प्रदेश और तुर्की में आपस में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दो बार तुर्की भी भेजा।
तुर्की में बिलारी विधायक को विशेष सम्मान देकर नवाजा गया। जब जब विधानसभा का सत्र चला तब तब उनकी सदन में शत-प्रतिशत उपस्थिति रही। वह अपने चार साल के कार्यकाल में 28 बार प्रदेश विधानसभा में बोले।
कुराने पाक का हिंदी और उर्दू में तरजुमा कर लिखी थी किताब
विधायक हाजी मोहम्मद इरफान पांच वक्त के नमाजी होने के साथ ही अपने मजहबे इस्लाम के भी काफी जानकार थे। वह आधी रात को तहज्जुद की नमाज भी प्रतिदिन पढ़ते थे। विधायक ने कुरान-ए- पाक का हिंदी और उर्दू में अलग अलग तरजुमा करते हुए ‘मुन्तखब तर्जमतिल कुरआन’ शीर्षक से किताब भी लिखी।
इस किताब के लिखने पर उन्हें तुर्की में विशेष सम्मान दिया गया। विधायक द्वारा लिखे हुए कई लेख समाजवादी बुलेटिन में भी प्रकाशित हुए। उनके लेखों पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी उन्हें बधाई पत्र भेजे थे।
अकेले मार्निंग वाक करते थे विधायक
विधायक हाजी मोहम्मद इरफान के व्यक्तित्व के बारे में यह खास बात भी लोगों में चर्चा का विषय रही है कि वर्तमान समय में जहां विधायक और अन्य राजनेता अपनी सुरक्षा के प्रति चिंतित रहकर सुरक्षा गार्डों और कई निजी बंदूक धारियों को साथ लेकर चलते हैं वहीं विधायक मोहम्मद इरफान अपने घर के पास गांधीपार्क और स्टेशन रोड पर तड़के अकेले ही मार्निंग वाक को जाते थे।
मार्निंग वाक से लौटकर आने के बाद अपने मोहल्ले की मदीना मस्जिद में फज्र की नमाज पढ़ते थे। उनके अकेले मार्निंग वाक पर जाने पर कई बार समर्थकों ने भी सुरक्षा गार्ड साथ लेकर चलने का सुझाव दिया था।
इरफान के निधन से हुआ व्यक्तिगत नुकसान
बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की सड़क हादसे में मौत की खबर से सपाइयों में शोक छा गया। विधायक का शव गुरुवार को जब रामपुर पहुंचा तो नगर विकास मंत्री आजम खां ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। विधायक के शोक संतृप्त परिवार को ढांढस बंधाया। कहा कि विधायक हाजी इरफान के निधन से समाजवादी पार्टी को ही नहीं, बल्कि उनको व्यक्तिगत रूप से नुकसान हुआ है।
बिलारी के सपा विधायक हाजी इरफान की सैफई जाते वक्त बदायूं में कार पलटने से मौत हो गई थी। विधायक अपने बेटे फईम के साथ सैफई में लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव के बेटे की शादी में शामिल होने जा रहे थे। हादसे में विधायक समेत तीन लोगों की मौत हो गई। विधायक की मौत की खबर लगते ही सपाइयों में शोक छा गया। विधायक के परिजन शव को गुरुवार दोपहर बरेली से बिलारी जा रहे थे।
हाईवे पर कोसी पुल के पास बाईपास पर विधायक का शव पहुंचा तो सपाइयों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नगर विकास मंत्री आजम खां ने विधायक परिवार को ढांढस बंधाया। आजम खां की भी आंखें छलक आईं। आजम खां ने कहा कि हाजी इरफान के निधन से समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। उनको व्यक्तिगत तौर पर भी काफी नुकसान हुआ है। इस मौके पर कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा, डीएम राकेश कुमार सिंह, एसपी साधना गोस्वामी के साथ ही पुलिस व प्रशासनिक अफसर मौजूद रहे।
कहा था कि इस साल सारे काम पूरे करूंगा
सोमवार की आधी रात को ही विधायक लखनऊ से लौटे थे। मंगलवार की सुबह अपने परिवार साथ बैठकर सियासी हालातों पर चर्चा कर रहे थे। दोपहर को बिलारी विधानसभा क्षेत्र के सीमांत सरथल गांव में अपने एक सम्मान समारोह में पहुंचे। इस समारोह में विधायक ने कहा था, मैं चाहता हूं कि बिलारी क्षेत्र में इतना विकास हो कि प्रदेश भर में सबसे आदर्श विधानसभा बने।
मेरी विधानसभा का हर वोटर खुशहाल रहे और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी जिए। मैं चाहता हूं कि समाज से ऊंच नीच और जाति धर्म का भेद खत्म हो। हर परिवार का बच्चा शिक्षित बने। क्षेत्र में हमेशा भाईचारा और सौहार्द बना रहे। मैंने अब तक के चार साल के कार्यकाल में अनेक विकास कार्य कराए हैं। मैं चाहता हूं कि मेरी विधानसभा में बिजली की कमी की समस्या न रहे। कोशिश है कि शेष काम इस एक साल में हर हाल में पूरा कराऊंगा।
चालक के घर भी मचा कोहराम
बदायूं में हुए सड़क हादसे में विधायक मोहम्मद इरफान के जिस कार चालक फरजंद अली की मौत हुई है उसके घर में कोहराम मचा है। फरजंद अली के घर में उसके वृद्ध पिता मुंशी असद अली के अलावा माता रफीकन, भाई राशिद, मुशाहिद और मुनाजिर, पत्नी इशरत जहां और दो बेटियां निशा सात वर्ष और बुशरा तीन वर्ष हैं।
तेवरखास गांव निवासी कार चालक फरजंद अली बीते लगभग पांच साल से विधायक मोहम्मद इरफान का कार चालक रहा है। चालक फरजंद की मौत की खबर पर उसके घर में कोहराम मचा हुआ है।
बिलारी पहुंचे सभी बड़े अफसर
विधायक के निधन की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी बिलारी दौड़ गए। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर और एसएसपी नितिन तिवारी के साथ सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। शाम तक यह सभी लोग यहां मौजूद रहे।
बड़ी संख्या में पहुंचे सियासी लोग
बिलारी विधायक के निधन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में सियासी लोग उनके आवास पर पहुंचे और गम का इजहार किया। शहर विधायक यूसुफ अंसारी, पूर्व एमएलसी चंद्रपाल सिंह उर्फ पप्पू चौधरी, बिलारी के बसपा नेता अनिल चौधरी, वाजिद हुसैन अंसारी, कुंदरकी विधायक प्रतिनिधि हाजी उवैस उर्फ कल्लन, ब्लाक प्रमुख अनोखे लाल यादव, मुकुट सिंह अमरपुरकाशी और गन्ना समिति चेयरमैन अरविंद मोहन समेत तमाम लोग पहुंचे।
अंतिम दीदार को उमड़ा जनसैलाब
विधायक के अंतिम दीदार को जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिलारी और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग एमएजेएमआई इंटर कालेज में पहुंचे जहां उनका शव अंतिम दीदार को रखा गया था। यहां बढ़ी भीड़ को कंट्रोल कर पाना भी पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा था। भीड़ का आलम यह था कि नियंत्रण कर पाना भी मुश्किल हो पा रहा था।
पैंतीस साल तक की वकालत
रामरतन इंटर कालेज में इंटर तक शिक्षा, बाद में मुरादाबाद के केजीके डिग्री कालेज में बीएससी और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। 1978 में उन्होंने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल से अधिवक्ता की डिग्री हासिल की। लगभग 35 साल तक उन्होंने विभिन्न अदालतों में वकालत की।
वकालत के दौरान उनका लगाव राजनीति और समाजसेवा से भी रहा। वर्ष 1977 में मोहम्मद इरफान ने अपने ससुर मकबूल अहमद को रामपुर जिले के स्वार टांडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनवाने में अहम भूमिका निभाई।
सियासी जीवन
- वर्ष 1977 में अपने ससुर मकबूल अहमद को रामपुर जिले के स्वार टांडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनवाने में अहम भूमिका निभाई
- वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन सांसद मरहूम हाजी गुलाम मोहम्मद के मुख्य चुनाव अभिकर्ता रहे।
- 1995 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क के मुख्य चुनाव अभिकर्ता रहे।
- बिलारी में बार एसोसिएशन के चार बार अध्यक्ष भी रहे।
- 1996 में बिलारी के पहाड़पुर कांड में प्रदेश शासन ने उन्हें शांति समिति का अध्यक्ष नामित किया।
- मुस्लिम रिजर्वेशन फ्रंट के जिलाध्यक्ष रहे
- ऑल इंडिया तंजीमे अहले सुन्नत के मंडल अध्यक्ष और तुर्क कबाइल फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
- दूर संचार सलाहकार समिति के सदस्य नामित होने के अलावा ओरियंटल बैंक और गन्ना समिति के कानूनी सलाहकार रहे।