हाथरस कांडः पीड़िता की पहचान उजागर करने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, फेसबुक, ट्विटर से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 08 Jan 2021 10:28 PM IST
Hathras case
Hathras case - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले सहित अन्य दुष्कर्म पीड़िताओं की पहचान कथित तौर पर उजागर करने को लेकर दिल्ली सरकार, ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और कई अन्य मीडिया संस्थानों से जवाब-तलब किया है।
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दरअसल, एक याचिका दायर कर इनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमर्ति ज्योति सिंह ने याचिका पर नोटिस जारी किया और ‘बजफीड’, ‘द सिटीजन’, ‘द टेलीग्राफ’ ‘आई दिवा’, ‘जनभारत टाइम्स’, ‘न्यूज 18’, ‘दैनिक जागरण’, ‘यूनाटेड न्यूज ऑफ इंडिया’, ‘बंसल टाइम्स’, ‘दलित कैमरा’, ‘द मिलेनियम पोस्ट’ और ‘विकिफीड’ से जवाब भी मांगा है। अदालत ने सुनवाई पांच फरवरी के लिए सूचीबद्ध की है।


याचिका के जरिए दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह सोशल मीडिया मंचों और मीडिया संस्थानों से ऐसी कोई सामग्री, खबर, सोशल मीडिया पोस्ट या ऐसी कोई भी सूचना हटाने को कहे, जिनमें हाथरस सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता या इस तरह के अन्य मामलों की पीड़िता की पहचान का ब्योरा हो।

याचिकाकर्ता मनन नरूला ने आरोप लगाया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 228 का घोर उल्लंघन किया गया है। पीड़िता की पहचान का खुलासा कर उसके निजता के अधिकार का हनन करने वालों के खिलाफ उन्होंने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता सुमन चौहान और जिवेश तिवारी के मार्फत दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि उल्लेख किए गए इन सभी प्रकाशनों/पोर्टलों/ समाचार संस्थानों ने पीड़िता के बारे में ऐसी सूचना प्रकाशित की, जो व्यापक स्तर पर लोगों के बीच उसकी पहचान को उजागर करती है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में जिस दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या की घटना हुई, उसके नाम का ट्विटर पर सेलीब्रिटी एवं क्रिकेटर सहित बड़ी संख्या में लोगों ने ‘हैशटैग’ के साथ इस्तेमाल किया।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि पीड़िता की पहचान उजागर करने का मुद्दा बहुत ही गंभीर है, खासतौर पर सोशल मीडिया के युग में। मेहरा ने कहा कि याचिकाकर्ता को प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने के लिए धारा 156(3) के तहत निचली अदालत का रुख करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पीड़िता की पीड़ा को समझ सकता हूं और कानून इस बारे में स्पष्ट है कि आप पीड़िता की पहचान को उजागर नहीं कर सकते। ’’ याचिकाकर्ता के वकील ने पहले के एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें पीड़िता की पहचान उजागर की गई थी और उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था तथा कठुआ सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर कई मीडिया संस्थानों को कड़ी फटकार लगाई थी।

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