हरियाणा में कांग्रेस का निर्दलीयों को भावनात्मक संदेश- 'भाजपा का दिया साथ, तो जनता नहीं करेगी माफ'
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पार्टी नेताओं ने सात निर्दलीय विधायकों से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर बात कर उन्हें यह संदेश पहुंचा दिया है कि वे जनता के गुस्से से बचना चाहते हैं, तो भाजपा का समर्थन न करें। निर्दलीय विधायकों से केवल हुड्डा खेमे ने ही नहीं, बल्कि दिल्ली बैठे कई दूसरे नेताओं ने भी बातचीत कर उन्हें कांग्रेस की ओर लाने की कोशिश की गई है।
उम्मीद थी कि निर्दलीय देंगे साथ
विधानसभा चुनाव की गिनती खत्म होने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जजपा नेताओं और निर्दलीय विधायकों से कांग्रेस के साथ आने की अपील की थी। हुड्डा का कहना था कि कई निर्दलीय विधायक तो ऐसे हैं, जो देर-सवेर कांग्रेस पार्टी के समर्थक रहे हैं। अगर जजपा समय रहते कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दे, तो सभी निर्दलीय विधायक भी हमारे खेमे में आ जाएंगे। इसके बाद जजपा नेता दुष्यंत चौटाला से बातचीत शुरु हुई। कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए इनेलो में लंबे समय तक रहे और अजय चौटाला के करीबी माने जाने वाले कई नेताओं की मदद ली।
जजपा को मनाने की कोशिश
चुनाव से पहले इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए प्रदीप चौधरी, जो अब कालका से विधायक हैं, वे कई दशकों तक चौटाला परिवार के साथ रहे हैं। इस बाबत चौधरी से बात की गई। उन्होंने बात आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया। हुड्डा ने दुष्यंत चौटाला से बात करने के लिए ऐसे कई नेताओं का सहारा लिया। खास बात यह रही कि प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस पार्टी और देवीलाल की पार्टी को सदैव एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता रहा है।
इससे पहले जब कभी इन दोनों पार्टियों को सरकार बनाने के लिए थोड़े बहुत समर्थन की जरुरत पड़ी, तो भी वे एक दूसरे का समर्थन लेने से दूर रहे। यह पहला अवसर है जब पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने देवीलाल परिवार से समर्थन मांगा है। खैर, अभी तक जजपा की ओर से उन्हें समर्थन देने की कोई बात नहीं कही गई है। छह निर्दलीयों को फोन किया, लेकिन वे भी टस से मस नहीं हुए...
भेजे जा रहे हैं भावनात्मक संदेश
तीन निर्दलीय विधायकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि उनके पास कांग्रेस की ओर से कई फोन आए हैं। रानियां विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय जीत कर आए चौटाला परिवार के सदस्य रणजीत सिंह पहले कांग्रेस में ही थे। उन्हें टिकट नहीं मिला, तो वे निर्दलीय ही मैदान में कूद गए। उनके पास कांग्रेस पार्टी से फोन गया था। हालांकि उन्होंने वीरवार को ही बता दिया था कि वे भाजपा को समर्थन देंगे। दादरी विधानसभा क्षेत्र से जीत कर आए सोमबीर से भी हुड्डा खेमे ने संपर्क किया। दूसरे निर्दलीय विधायकों के पास भी कई बार फोन किए गए। यहां तक कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा ने खुद विधायकों से बात की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
गुरुवार रात से लेकर अभी तक तकरीबन सभी विधायकों के पास भावनात्मक संदेश भेजे जा रहे हैं। इनमें कहा गया है कि अगर वे भाजपा को समर्थन देते हैं, तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। वे ऐसा कर जनता को धोखा दे रहे हैं। भूपेंद्र हुड्डा के खास सहयोगी और कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अब निर्दलीय विधायकों से समर्थन मिलने की उम्मीद धूमिल हो चली है और जजपा भी साथ नहीं दे रही है।